2023 में दलाल स्ट्रीट की रिकॉर्ड तोड़ तेजी में (विदेशी संस्थागत निवेशकों) एफआईआई का खासा योगदान रहा। इन्होंने अपने पसंदीदा वित्तीय सेक्टर के शेयरों पर भरोसा जताया और आईटी शेयरों से दूरी बनाई। दूसरी ओर, पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े शेयरों में वैश्विक निवेशकों का भरोसा बना रहा।
2023 में (15 दिसंबर तक) एफआईआई की ओर से खर्च किए गए 1,45,852 करोड़ रुपये में से लगभग 30% प्रवाह (41,260 करोड़ रुपये) पूंजीगत वस्तुओं ( से जुड़े शेयरों में आया। जनवरी में इस क्षेत्र में महज 86 करोड़ रुपये की छोटी बिकवाली को छोड़कर एफआईआई कैलेंडर वर्ष के शेष सभी 11 महीनों में पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े शेयरों में शुद्ध खरीदार रहे। इस दौरान वित्तीय सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक 43,911 करोड़ रुपये की खरीदारी देखने को मिली। वित्तीय क्षेत्र में एफआईआई का औसत भारांश 33.1 प्रतिशत रहा जबकि पूंजीगत वस्तुओं के मामले में यह 5.1 प्रतिशत रहा।
मंदी की आशंका के बीच निवेशकों ने सॉफ्टवेयर निर्यातकों के प्रति वृद्धि और मार्जिन जोखिम की आशंका व्यक्त करते हुए जारी साल के दौरान करीब 10,600 करोड़ रुपये के आईटी शेयरों की बिकवाली की। वाहन कंपनियों के शेयरों में 28,746 करोड़ रुपये, उपभोक्ता सेवाओं में 16,884 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में 11,900 करोड़ रुपये की लिवाली देखी गई।
दिलचस्प बात यह है कि तेल, गैस और उपभोग्य ईंधन से जुड़े ओल्ड इकोनॉमी के क्षेत्रों से जुड़े शेयरों में ही सबसे ज्यादा 26,637 करोड़ रुपये की बिकवाली भी दिखी। मीडिया, धातु और रसायन क्षेत्र के शेयर भी बिकवाली दिखी।
ऐसे में यहां एक बड़ा सवाल है कि क्या आपको निवेश के मामले में एफआईआई का अनुसरण करना चाहिए? पिछले एक साल में बीएसई कैपिटल गुड्स इंडेक्स में करीब 60 पर्सेंट की तेजी आई है, जबकि सेंसेक्स में 16 पर्सेंट की तेजी आई है। पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी और पूंजी बाजार अपने विस्तार के लिए अच्छी गुणवत्तापूर्ण वूद्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों को पूंजीगत व्यय में अधिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।