घरेलू बचत पर महंगाई दर से भी कम ब्याज, खेती-किसानी से जुड़े श्रमिकों को कम भुगतान जैसी चुनौतियों के कारण भारत में सोने की चमक फीकी पड़ सकती है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि आय में वृद्धि सोने की मांग बढ़ने का सबसे बड़ा कारक है।
सरकारी शुल्क : सोने पर आयात शुल्क व अन्य करों से लंबी अवधि में सोने की खपत पर असर पड़ता है। हालांकि, यह इस पर तय होता है कि सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने में होगा या सिक्के अथवा ईंट बनाने में। 2012 से सोने पर ज्यादा आयात शुल्क की वजह से मांग में सालाना 1.2 फीसदी की दर से कमी आई।
महंगाई : भारतीय निवेशक सोने को हेज फंड की तरह इस्तेमाल करते हैं और बढ़ती महंगाई के बीच सोने में पैसे लगाना बेहतर समझते हैं। यही कारण है कि महंगाई का सोने की खरीद पर असर पड़ता है।
मानसून : बेहतर बारिश से सोने की घरेलू खपत में भी इजाफा होता है, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने की उम्मीद पैदा होती है। अगर बारिश में एक फीसदी इजाफा हुआ, तो सोने की मांग 0.2 फीसदी बढ़ जाएगी।
शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं में अंतर
भरोसा : अनिवार्य हॉलमार्किंग, सोने की ईंटों के लिए बेहतर मानक व गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज जैसे विकल्प भारतीय बाजार में ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएंगे। उपभोक्ताओं और निवेशकों का भरोसा बढ़ा तो सोने की खरीद में भी इजाफा होगा।
शिक्षा व जागरूकता : सोने के प्रति जागरूकता और जानकारी बेहतर होने से निवेशक आकर्षित होते हैं। खासतौर से छोटे निवशकों को टेलीविजन, अखबार आदि माध्यमों से सोने के भाव और भविष्य की जानकारी देना कारगर होगा।
इनोवेशन : ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल टूल, रोबो-सलाहकार, मोबाइल एप्लीकेशन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिये सोने को अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले खड़ा किया जा सकता है।