भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। जुलाई के 11.16 फीसदी के मुकाबले अगस्त में मुद्रास्फीति 11.39 फीसदी रही। इसमें मामूली बढ़त आई। जून में यह 12.07 फीसदी थी और मई में 12.94 फीसदी। डब्ल्यूपीआई अगस्त में लगातार चौथे महीने दोहरे अंकों में रही। बढ़त का मुख्य कारण प्राथमिक वस्तुओं के साथ-साथ ईंधन और बिजली की कीमतों में वृद्धि थी।
मालूम हो कि खाद्य पदार्थों की महंगाई लगातार चौथे महीने कम हुई। अगस्त में यह (-) 1.29 फीसदी थी, जबकि प्याज और दालों की कीमतों में वृद्धि हुई। प्याज की महंगाई 62.78 फीसदी, जबकि दालों की महंगाई 9.41 फीसदी बढ़ी। सब्जियों के मामले में इसमें कमी आयी और यह (-) 13.30 फीसदी थी। पेट्रोलियम और गैस की महंगाई की बात करें, तो कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई अगस्त में 40.03 फीसदी बढ़ गई। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई अगस्त में 11.39 फीसदी बढ़ी, जबकि जुलाई में यह 11.20 फीसदी थी।
5.30 फीसदी रही खुदरा महंगाई दर
इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को अगस्त माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े जारी किए। इसमें मामूली गिरावट आई है। जुलाई में सीपीआई 5.59 फीसदी था, जो अगस्त में घटकर 5.30 फीसदी पर आ गया। यह महंगाई या मुद्रास्फीति दर में मामूली गिरावट का संकेत देता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में महंगाई दर में गिरावट आई है। यह अगस्त में 5.30 फीसदी हो गई है। इससे पहले, जून में खुदरा महंगाई दर 6.26 फीसदी पर पहुंच गई थी। इसके बाद जुलाई में यह घटकर 5.59 फीसदी हो गई थी। अगस्त में इसमें और कमी आई है।
ऐसा दूसरी बार है जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 फीसदी के अधिकतम लक्ष्य के नीचे आया है। इससे पहले, मई और जून में लगातार दो महीने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक छह फीसदी के ऊपर रहा था।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में कहा था कि महंगाई दर में धीरे-धीरे सुधार दर्ज होगा। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि जल्द ही खुदरा महंगाई छह फीसदी के लक्ष्य के दायरे में आ जाएगी।
11 राज्यों ने पूरा किया पूंजीगत व्यय का लक्ष्य
मालूम हो कि वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, केरल, मणिपुर और उत्तराखंड सहित 11 राज्यों ने 2021-22 की पहली तिमाही में पूंजीगत व्यय के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन 11 राज्यों में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, मेघालय, नागालैंड और राजस्थान भी शामिल हैं। राज्यों को वित्त मंत्रालय ने 15,721 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की मंजूरी दे दी है। इन 11 राज्यों को उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.25 फीसदी के बराबर खुले बाजार से अतिरिक्त कर्ज लेने की मंजूरी मिली है।