इससे पहले सरकार ने तीन महीने पहले यानी 12 जून को स्टॉक सीमा 3000 टन तय की थी, जो कि मार्च 2024 तक लागू रहनी थी। हालांकि अब कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए इसे फिर से कम कर दिया गया है।
अनाज की बढ़ती कीमतों को लेकर भारत सरकार खासी सतर्कता बरत रही है। यही वजह है कि सरकार ने अनाज व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रंख्ला वाले खुदरा व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा में कटौती की है। नए आदेश के तहत अब अनाज व्यापारी और थोक विक्रेता 2000 टन स्टॉक ही जमा कर सकते हैं, पहले ये सीमा 3000 टन थी।
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तीन महीने पहले ही की थी स्टॉक लिमिट तय
फैसले का एलान करते हुए खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि अनाज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए हमने स्टॉक सीमा की समीक्षा की। समीक्षा के तहत व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी श्रंख्ला वाले खुदरा व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट को 3000 टन से घटाकर 2000 टन कर दिया गया है। यह फैसला आज से ही प्रभाव में आ गया है। इससे पहले सरकार ने तीन महीने पहले यानी 12 जून को स्टॉक सीमा 3000 टन तय की थी, जो कि मार्च 2024 तक लागू रहनी थी। हालांकि अब कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए इसे फिर से कम कर दिया गया है।
देश में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता
चोपड़ा ने बताया कि कीमतों में अनाज की कीमतों में आई बढ़ोतरी के चलते स्टॉक सीमा में कटौती की गई है। एनसीडीईएक्स के अनुसार, गेहूं की कीमतों में बीते एक महीने में ही चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और अब यह 2550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। चोपड़ा ने कहा कि हालांकि देश में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन कुछ तत्व हैं जो कृत्रिम तरीके से कीमतों को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।