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Value Investing: लंबी अवधि में पूंजी बनाने का तरीका, देश की आर्थिक वृद्धि में भरोसा रखने वाले निवेशकों की पसंद

Mon, 12 Sep 2022 03:46 AM IST
देव कश्यप अजीत सिंह, नई दिल्ली।

सार

कभी भी पैसा बनाना हो तो नजरिया लंबे समय का रखना चाहिए। बेंजामिन ग्राहम, वॉरेन बफे, पीटर लिंच और जोएल ग्रीनब्लैट जैसे सभी दिग्गज निवेशकों ने पूंजी निर्माण के सर्वोत्तम तरीके के रूप में वैल्यू इन्वेस्टिंग का समर्थन किया है। यह क्या है और इसमें कैसे निवेश करें, इसकी पूरी जानकारी देती अजीत सिंह की रिपोर्ट...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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मॉर्निंगस्टार के कौस्तुभ बेलापुरकर का मानना है कि वैल्यू इन्वेस्ट ऐसी कंपनियों के स्टॉक को खोजना होता है, जो अपने वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर कारोबार कर रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी की मजबूत स्थिति को देखते हुए उसके शेयर जिस ऊंचाई पर होने चाहिए, कारोबार उससे नीचे हो रहा होता है। ऐसे शेयर में पैसे लगाने पर लंबी अवधि में तगड़ा रिटर्न मिलने का पूरा अवसर रहता है। इसके लिए म्यूचुअल फंड सही रास्ता होता है। म्यूचुअल फंड का चयन करते समय निवेशकों को एसेट मैनेजमेंट कंपनी और व्यक्तिगत फंड के प्रदर्शन एवं निवेश तरीके को समझने की जरूरत है। इससे यह पता चल जाएगा कि बाकी फंडों की तुलना में यह कैसा प्रदर्शन करेगा। हालांकि, ऐसा करना आसान नहीं है क्योंकि इंडस्ट्री वैल्यू इन्वेस्टिंग जैसे शब्दों का बहुत कम इस्तेमाल करती है। जो चतुर निवेशक हैं और जिन्हें भारत की वृद्धि में भरोसा है, वे इस तरह का फैसला ले रहे हैं। फिर भी विदेश की तुलना में भारत में निवेशक इससे कम परिचित हैं।

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कई फंड वैल्यू कैटेगरी में पुनर्वर्गीकृत
मॉर्निंगस्टार के विश्लेषण के अनुसार, 2018 के बाद जिन कई फंडों को वैल्यू कैटेगरी में पुनर्वर्गीकृत किया गया, उनके पोर्टफोलियो में भी ग्रोथ स्टॉक होल्डिंग्स में गिरावट दिखाई दे रही है। बड़े पैमाने पर वैल्यू स्टॉक्स में मामूली वृद्धि हुई है। कई तथाकथित वैल्यू फंड ‘रिलेटिव वैल्यू’ अप्रोच को फॉलो करते हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट के  मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) एस नरेन भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सबसे अनुभवी मैनेजरों में से एक है। इन वर्षों में उन्होंने अपने द्वारा प्रबंधित धन के आधार पर एक दमदार ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है। चूंकि, वह निवेश की वैल्यू स्टाइल के प्रैक्टिशनर रहे हैं, इसलिए फंड की रणनीति उन्हें अपनी ताकत से खेलने की अनुमति देती है।

निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा
वैल्यू रिसर्च के अनुसार, वैल्यू इन्वेस्टिंग में जो सबसे बड़ा फंड हाउस है, उसने बेहतर रिटर्न दिया है। उदाहरण के तौर पर, आईप्रू के वैल्यू फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 24,694 करोड़ रुपये है जो वैल्यू कैटेगरी में कुल एयूएम का लगभग 30 फीसदी है। यह स्कीम में वैल्यू इन्वेस्टिंग में निवेशक के विश्वास को दर्शाता है। अगर किसी निवेशक ने 2004 में इसमें एकमुश्त 10 लाख रुपये का निवेश किया होगा तो वह 31 जुलाई, 2022 को 2.5 करोड़ हो गया होगा। यानी  19.7 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न मिला है।
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निफ्टी-50 में इसी तरह के निवेश से 15.6 फीसदी का सीएजीआर मिलता और कुल कीमत 1.3 करोड़ रुपये होती। चूंकि, वैल्यू इन्वेस्टिंग लंबे समय के निवेश के लिए उपयुक्त होता है तो एसआईपी एक अच्छा निवेश का मार्ग बन जाता है। फंड की स्थापना के बाद से एसआईपी ने सालाना 17.3 फीसदी फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। इसलिए यह एसआईपी के जरिये निवेश करने वालों के लिए जबरदस्त विकल्प बन सकता है।

निवेश के तरीके समझने की जरूरत
म्यूचुअल फंड का चयन करते समय निवेशकों को फंड कंपनियों और व्यक्तिगत फंड के निवेश दर्शन एवं तरीकों को समझने की जरूरत है। भारत में अधिकांश इक्विटी फंड विकास आधारित हैं। विश्व के दिग्गज निवेशक वैल्यू इन्वेस्टिंग की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में भारतीय निवेशकों को इसका फायदा उठाना चाहिए। - हांसी मेहरोत्रा, संस्थापक, मनी हंस एंड मनी मैनेजमेंट इंडिया

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