केंद्रीय बजट में प्रमुख रूप से उन चार जातियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री करते आए हैं। ये चार जातियां गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता हैं। वित्त मंत्री ने इसमें मध्यवर्ग को भी जोड़ा है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया और इसमें अभी 23 साल का वक्त शेष है।
हाल में संपन्न लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार पर रोजगार और युवाओं का ध्यान न रखने के कई आरोप लगे। लेकिन इस बजट के माध्यम से सरकार ने इन आरोपों का करारा जवाब दिया है। केंद्रीय बजट में प्रमुख रूप से उन चार जातियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री करते आए हैं। ये चार जातियां गरीब, महिलाएं, युवा और अन्नदाता हैं। वित्त मंत्री ने इसमें मध्यवर्ग को भी जोड़ा है। प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया और इसमें अभी 23 साल का वक्त शेष है। अगर उस समय तक भारत को विकसित बनाना है तो युवा पर विशेष फोकस की जरूरत है, खासकर उस युवा की जो 15 से 20 साल की आयुसीमा में है। क्योंकि विकसित भारत के लक्ष्य में इस आयुवर्ग के युवा की विशेष भूमिका होने वाली है। विशेष बात यह है कि आज का युवा महत्वाकांक्षी है और जीवन को एक अलग ढंग से जीना चाहता है। यही वजह है कि बजट में युवाओं को विशेष महत्व दिया गया है।
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इंटर्नशिप योजना युवाओं के लिए क्रांतिकारी कदम
एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप देने की पहल बहुत क्रांतिकारी है। इसके तहत देश की शीर्ष कंपनियों में युवाओं को इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा वह भी 5,000 रुपये स्टाइपेंड के साथ। इसके तहत शुरुआत में उन्हें 6,000 रुपये एकमुश्त मिलेगा और एक साल की इंटर्नशिप 5,000 रुपये के स्टाइपेंड के साथ मिलेगी। इससे नौकरी शुरू करने वाले युवाओं को पता चलेगा कि बड़ी कंपनियां कैसे चलती हैं। आमतौर पर बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप मिलना अत्यंत कठिन होता है लेकिन अब सरकार की योजना के तहत इन्हें युवाओं को मौका देना पड़ेगा, उन्हें सिखाना होगा। यह उनके आगे के कॅरिअर में बेहद उपयोगी साबित होगा।
बजट में युवाओं के रोजगार के क्षेत्र में और भी कई घोषणाएं की गई हैं। लेकिन इंटर्नशिप योजना सबसे प्रभावशाली है, यह करोड़ों युवाओं के जीवन एवं कॅरिअर पर प्रभाव डालेगी।
ईपीएफओ में सहयोग से नई नौकरियों का निर्माण
ईपीएफओ में सहायता राशि देने से एक कंपनी को कॉस्ट टू कंपनी (सीटीसी) को प्रबंधित करना आसान हो जाएगा। इसका असर नए रोजगार निर्माण पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा। यह किसी को नौकरी देने का बहुत बड़ा इंसेंटिव साबित होगा। दूसरी बात यह है कि युवा को भी यह अनुभव होगा कि सरकार मेरे बारे में कुछ सोच रही है। इस कदम से नौकरी एक सहभागी कार्यक्रम बन जाएगी, इसमें तीन पार्टियां भूमिका निभाएंगी। उनमें पहली होगी सरकार, दूसरा नियोक्ता यानि कंपनी और तीसरा नौकरी करने वाला। सरकार की ओर से ईपीएफओ में सहयोग देने की योजना का सबसे बड़ा सकारात्मक असर यह होगा कि जो बॉर्डर के मामले हैं, यानी जिन रिक्तियों की कंपनी को बहुत अधिक जरूरत नहीं है, वहां भी उन्हें रोजगार हासिल करने की संभावना बन जाएगी। इससे कंपनियों को अतिरिक्त कार्यशक्ति गठित करने में मदद मिलेगी।