वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आम बजट एक फरवरी 2020 को पेश होगा। वहीं इससे पहले शुक्रवार 31 जनवरी को केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के जरिये ‘अच्छे दिन’ का भरोसा दिलाया और सुनहरे भविष्य की उम्मीद जताई। इस सर्वे में पांच साल में चार करोड़ नौकरियां देने का चीन का फॉर्मूला सुझाया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में 6-6.5 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में यह पांच फीसदी ही रहेगा। यह 11 साल की सबसे कम विकास दर होगी।
अंतरिम बजट एक खास समय के लिए होता है। चुनावी साल में सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। यह बजट चुनावी वर्ष में नई सरकार के गठन तक खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता होता है। अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के शुरुआती तीन से पांच महीने या फिर चुनाव संपन्न होने तक के लिए अंतरिम बजट पेश होता है। जो नई सरकार सत्ता में आती है, वो पूर्ण बजट पेश करती है। यह इसलिए पेश किया जाता है ताकि सरकार की तरफ से होने वाले खर्चों में किसी तरह की कोई कमी न आए।
अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट में थोड़ा सा अंतर होता है। अगर सरकार कुछ महीनों के लिए खर्चा चलाने के लिए ससंद से मंजूरी मांगती है तो उसे वोट ऑन अकाउंट कहते हैं। वहीं अगर सरकार खर्च के अलावा कमाई का ब्यौरा भी पेश करती है, तो उसके अंतरिम बजट भी कहा जाता है।
अंतरिम बजट में सरकार आम तौर पर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेती है लेकिन इसके लिए किसी तरह की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। इतिहास में कई बार पूर्व सरकारों के वित्त मंत्रियों ने अंतरिम बजट में भी कई तरह के नीतिगत फैसले लिए हैं। हालांकि नई सरकार सत्ता में आने के बाद इनको बदल सकती है।