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Interview: एल्यूमीनियम के बर्तन में पके खाने से कोई नुकसान नहीं, सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद

सार

देश की सबसे बड़ी प्रेशर कुकर निर्माता कंपनी टीटीके प्रेस्टीज के प्रबंध निर्देशक चंद्रू कालरो से बंगलूरू स्थित उनके दफ्तर में अमर उजाला के संजय अभिज्ञान से हुई खास बातचीत के अंश...
 
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टीटीके प्रेस्टिज के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रू कालरो से वरिष्ठ पत्रकार संजय अभिज्ञान ने पूछे सवाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एल्यूमीनियम से बने प्रेशर कुकर या दूसरे बर्तनों में पका खाना सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। 700 से अधिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी टीटीके प्रेस्टीज का कहना है कि नॉनस्टिक कुकवेयर भी कम तेल में खाना पकाने की क्षमता के कारण सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह बात अलग है कि हाल के वर्षों में लोगों में एल्यूमीनियम के बर्तनों को लेकर कुछ गलत धारणाएं पनप गईं हैं और उनमें स्टील के प्रेशर कुकर को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है। इसकी एक वजह लोगों की कमाई बढ़ना भी है।

  • कनेक्टेड भारत की वजह से छोटे शहरों के उपभोक्ता भी गुणवत्ता को लेकर सजग हुए हैं।
  • 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना कारोबार करने वाली कंपनी ने कहा, हमारी 80 फीसदी बिक्री आज छोटे शहरों से आती है।

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सवाल: दिवाली पर बर्तनों की शुभ खरीदारी के समय बहुत से ग्राहक एल्यूमीनियम और स्टील को लेकर दुविधा में रहते हैं। आपकी इस बारे में क्या सलाह है?
जवाब: एल्यूमीनियम में कोई खराबी नहीं। देखिए, आज से 70 साल पहले हमारी कंपनी ही भारत में पहली बार प्रेशर कुकर लेकर आई थी। आज भी प्रेस्टीज प्रेशर कुकर के करीब 150 मॉडल मार्केट में है। प्रेशर कुकर सेगमेंट का सबसे बड़ा मार्केट शेयर भी हमारा ही है। मैं पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि एल्यूमीनियम के कुकर या बर्तनों में पका खाना सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं है। हाल के वर्षों में लोगों में स्टील के कुकर का क्रेज बढ़ रहा है। इसकी कई वजह हैं। एक तो एल्यूमीनियम को लेकर कुछ गलत धारणाएं पनप गईं हैं। दूसरे, स्टील के कुकर देखने में ज्यादा चमकदार होते हैं। तीसरे, बढ़ती आमदनी के कारण उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता बढ़ गई है। इसलिए, किफायती एल्यूमीनियम की बजाय महंगे स्टील उत्पादों की तरफ जाने से उन्हें कोई गुरेज नहीं है।
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सवाल: क्या पिछले कुछ दशक में रसोई उपकरणों के उपभोक्ता में भी कुछ बदलाव आया है?
जवाब: जी, बिलकुल। आज उपभोक्ता कुकर खरीदने के लिए धनतेरस या दिवाली की प्रतीक्षा नहीं करता। छोटे शहरों के ग्राहकों को आज उम्दा से उम्दा क्वालिटी और फीचर चाहिए। हमारी 80 फीसदी बिक्री आज छोटे शहरों से आती है। अब छोटे शहरों के नौजवानों को बड़े शहरों की कंपनियों में नौकरी करने के लिए घर छोड़ने की आवश्यकता नहीं। नेशनल लॉजिस्टिक नीति इसी दिशा में सहयोग करेगी। इसलिए छोटे शहरों का महत्व और बढ़ेगा।

सवाल: टीटीके प्रेस्टीज के शेयरधारकों को क्या अच्छी खबर आप देना चाहेंगे?
जवाब: शेयरधारकों को गुडविल एवं रिटर्न के अलावा और क्या चाहिए। कंपनी 2003 में 116 करोड़ के कारोबार से लेकर 2021 में 2,500 करोड़ तक का सफर तय कर चुकी है। रसोई उपकरण बाजार में हमारे निकटतम प्रतिद्वंद्वी का कारोबार हमसे आधा ही होगा। हमारी तरह करीब 15 फीसदी का मुनाफा देने वाली ज्यादा कंपनियां देश में नहीं हैं। हम लगभग सभी श्रेणियों में लीडर हैं। सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनल पाटर्नरों का भरोसा हमारे साथ है।

सवाल: आपके डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के ताजा आंकडे़ क्या हैं?
जवाब: 380 शहरों में हमारे 670 एक्सक्लूसिव फुलफिलमेंट स्टोर हैं। इसके अलावा, 65,000 रिटेल आउटलेट हैं। 65 फीसदी बिक्री इन दोनों से आती है। बाकी मॉडर्न रिटेल यानी ऑनलाइन से और इंस्टीट्यूशनल सेल से मिलती है।

सवाल: उत्तर भारत में भी प्रेस्टीज के उत्पादों की मांग बढ़ी है?
जवाब: आज से 20 साल पहले हमारी कंपनी की 80 फीसदी बिक्री दक्षिण भारत में होती है। आज हमारा 55 फीसदी कारोबार शेष भारत से आता है और सिर्फ 45 फीसदी दक्षिण भारत से। हाल ही में हमने यूपी के 20 जिलों में अपने 7,000 रिटेल आउटलेट पर एक सर्वेक्षण के नतीजों ने हमें चौंका दिया। हमने पाया कि कुकर से ज्यादा वहां हमारी इलेक्ट्रिक केतली और इंडक्शन चूल्हे बिक रहे हैं। देश के सबसे बड़े राज्य में हमारी पहचान कुकर तक सीमित नहीं रही। किसी भी कंपनी के लिए गैर-इलेक्ट्रिक से इलेक्ट्रिक तक की यह यात्रा आसान नहीं होती। उत्तर भारत में इनर लिड वाले कुकर पसंद किए जाते हैं। हमने इनर लिड वाले मॉडल उत्तर भारत में आपूर्ति किए। सच तो यह है कि उत्तर भारत का उपभोक्ता किसी भी मायने में दक्षिण भारतीय उपभोक्ता से कमतर नहीं।

सवाल: प्रेस्टीज स्मार्ट किचन सीरिज के आपके एक्सक्लूसिव फुलफिलमेंट स्टोर कितने कामयाब रहे हैं?
जवाब: बहुत सफल हैं। देखिए, हम लगातार नए उत्पाद बाजार में ला रहे थे। पारंपरिक आउटलेट या डिस्ट्रीब्यूटर आसानी से नए उत्पादों पर हाथ नहीं रखते। लिहाजा, हमें उपभोक्ताओं को नए प्रोडक्ट से रू-ब-रू कराने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन ड्राइवर स्टोर खोलने पड़े। हमने इन्हें फुलफिलमेंट स्टोर नाम दिया। उनका बहुत असर हुआ। आज हमारी कुल बिक्री का 15 फीसदी हिस्सा इन्हीं स्टोर से आ रहा है। लेकिन, टर्नओवर में 50 फीसदी हिस्सेदारी अब भी पारंपरिक ऑफलाइन स्टोरों की है।


सवाल: युवा उद्यमियों के लिए प्रेस्टीज जैसी एक लीडर कंपनी की क्या नसीहतें हैं?
जवाब: कुछ मूलमंत्र हैं उद्यमिता के। पहला...उत्पाद नहीं, बाजार में समाधान परोसो। लोगों की परेशानियां दूर करने के मकसद को सबसे आगे रखो। दूसरा...तकनीक के बदलाव के साथ सीखो और खुद को बदलो। नई तकनीक को गले लगाओ। तीसरा...उपभोक्ता के लिए हमेशा सहानुभूति रखो।

वे जिस प्लेटफॉर्म पर चाहें, वहीं अपना माल पहुंचाओ। ऑनलाइन, ऑफलाइन कुछ भी, उसकी पसंद की जगह पर जाओ। चौथा...वेल्यूशन बनाने की बजाय वेल्यू क्रिएशन पर फोकस करो। आखिरी...खर्च को नियंत्रित रखो। न्यूनतम लागत वाला टिकाऊ बिजनेस मॉडल अपनाओ। बाजार में लंबा टिकने की रणनीति पर फोकस करो। दिखावे से बचो।

सवाल: एल्यूमीनियम-स्टील का कुकर की बिक्री में कितना हिस्सा है?
जवाब: स्टील की तरफ रुझान के कारण आज हमारे 40 फीसदी प्रेशर कुकर स्टील के बन रहे हैं। मसलन, उत्तर प्रदेश की बात करें तो चार-पांच वर्ष पहले वहां बिकने वाले हमारे 90 फीसदी प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम के होते थे। केवल 10 फीसदी स्टील के थे। आज वहां 50 फीसदी प्रेशर कुकर स्टील के बिक रहे हैं।

सवाल: प्रेस्टीज सिर्फ कुकर नहीं बनाती। अपनी पूरी प्रोडक्ट रेंज के बारे में बताएं।
जवाब: आपने सही कहा। भारत में कुकर की जनक कंपनी होने के बावजूद आज हमारे कुल बिक्री कारोबार का एक तिहाई ही कुकर श्रेणी से आता है। दो-तिहाई बिक्री कारोबार दूसरे उत्पादों जैसे मिक्सर ग्राइंडर, गैस स्टोव, नॉनस्टिक कुकवेयर, इंडक्शन कुकवेयर आदि से आता है। मिक्सर ग्राइंडर के हमारे 75 मॉडल बाजार में हैं। यूं समझिए, रसोई में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी अप्लायंसेज हम बनाते हैं। हमारा मूलमंत्र बड़ा आसान है। उपभोक्ता को उत्पाद नहीं, समाधान दो। उसकी रोजमर्रा लाइफ की परेशानियां हल करो। प्रेस्टीज के 700 से अधिक प्रोडक्ट बाजार में हैं। हमारे 900 रुपये के किफायती मॉडल से लेकर 4,000 रुपये तक के सुपर प्रीमियम कुकर तक मौजूद हैं।

सवाल: इसके लिए आपका रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग कितना सक्रिय रहता है?
जवाब: टीटीके प्रेस्टीज हर साल कोई 100 नए प्रोडक्ट मार्केट में उतारता है। यह हमारे बहुत ही गहन आरएंडडी प्रयासों से ही संभव है। हमारे लगभग सारे नए उत्पाद हमारी अपनी घरेलू रिसर्च टीम विकसित करती है। मैं आपको याद दिला दूं कि 70 के दशक में प्रेस्टीज ने ही स्वदेशी तौर पर कुकर का गास्केट रिलीज सिस्टम ईजाद किया था। हमारा व्यापार दर्शन कहता है कि हमारे प्रतिद्वंद्वी भी बाजार को विकसित करने में योगदान देते हैं। हमें एक स्तर पर उन्हें भी सहयोग करना चाहिए। वास्तव में इनोवेशन का हमारा लंबा इतिहास है। देश में सबसे पहले कंडोम बनाना टीटीके ग्रुप ने आरंभ किया। टीटीके हेल्थकेयर हार्ट वॉल्व बनाने वाली देश की अकेली कंपनी है। 1928 में स्थापित टीटीके समूह देश का पहला ऑर्गेनाइज्ड वितरक था, जिसने उस जमाने में ओवलटीन, हॉर्लिक्स, वुडवर्ड्स ग्राइपवाटर, पार्कर पेन, पौंड्स जैसे ब्रांड पहली बार पेश किए थे। नक्शा यानी मैप बनाने वाली देश की पहली कंपनी भी टीटीके ग्रुप की थी। 1968 में हमने कुकर का उत्पादन शुरू किया। हालांकि, ब्रिटेन की जनक कंपनी प्रेस्टीज यूके से कुकर का आयात हम पहले ही कर रहे थे।  आज हम केवल भारत में प्रेस्टीज ब्रांड का इस्तेमाल कर सकते हैं। जल्द ही हम देश में पहली बार छह तह वाला यानी सिक्स लेअर कोटिंग वाला नॉनस्टिक कुकवेयर पेश करने जा रहे हैं। हर प्रोडक्ट के लिए हमारी रिसर्च टीम के चार मकसद होते हैं...उपभोक्ता की सेहत, उसकी सुविधा, समय की बचत और उत्पाद के डिजाइन की खूबसूरती।

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सवाल: सामाजिक कार्यों में कितना योगदान है?  
जवाब: तमिलनाडु के मंजाकुड़ि गांव में 3,500 स्टूडेंट का एक स्कूल हमारा समूह चलाता है। इसमें पूरी तरह मुफ्त शिक्षा मिलती है। वोकेशनल ट्रेनिंग और नौकरी लगने तक उनका पूरा सहयोग किया जाता है। साथ ही, हेल्थकेयर इकाई रक्त संबंधी योगदान के लिए एक ब्लड रजिस्ट्री चलाती है। ऐसी कुछ और गतिविधियां भी हैं।

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