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DGGI: 10 विदेशी एयरलाइनों को 10000 करोड़ रुपये का GST नोटिस; IATA बोला- भारत के अलावा विश्व में ऐसा कहीं नहीं

Tue, 06 Aug 2024 09:22 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) भारतीय विमानन कंपनियों सहित 330 से अधिक एयरलाइन्स का प्रतिनिधित्व करता है। वैश्विक हवाई यातायात में आईएटीए के सदस्यों की 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी। 
 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भारत में अपनी सेवाएं देने वाली दस विदेशी विमानन कंपनियों को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी मांगों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसे लेकर वैश्विक एयरलाइन समूह आईएटीए ने चिंता जाहिर की है। आईएटीए ने इसे हल करने के लिए केंद्र सरकार से अपील की है। साथ ही कहा है कि यह मामला देश की मजबूत विमानन क्षमता को कमजोर और जोखिम में डाल सकता है।

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गौरतलब है कि इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) भारतीय विमानन कंपनियों सहित 330 से अधिक एयरलाइन्स का प्रतिनिधित्व करता है। वैश्विक हवाई यातायात में आईएटीए के सदस्यों की 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी थी। जिन कंपनियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा, ओमान एयर, अमीरात और सिंगापुर एयरलाइंस शामिल हैं। पिछले तीन दिनों में भेजे गए नोटिस इन एयरलाइंस की भारतीय यूनिट्स पर बकाया टैक्स से जुड़े हैं। इन एयरलाइंस के मुख्य कार्यालय से सेवा के आयात पर टैक्स बकाया है।

 सरकार से मामले को सुलझाने की अपील करते हुए आईएटीए ने कहा कि उसे निराशा है कि जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) ने इस मामले में कई अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद भारत में परिचालन करने वाली कुछ विदेशी एयरलाइनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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आईएटीए के उत्तर एशिया और एशिया प्रशांत क्षेत्र के अंतरिम क्षेत्रीय उपाध्यक्ष शी जिगक्वांन ने कहा कि डीजीजीआई का यह दावा कि ऐसे विदेशी एयरलाइन जिनके ब्रांच ऑफिस भारत में हैं। उनके मुख्यालयों द्वारा हवाई परिवहन सेवाएं प्रदान करने के दौरान किए गए व्यय पर जीएसटी लागू करना गलत है। भारत ऐसा करने वाला अकेला देश है। विश्व में कहीं भी ऐसा नहीं होता। भारत से बाहर के गंतव्यों के लिए उड़ान भरने वाली भारतीय विमानन कंपनियों को ऐसी स्थिति या मांग का सामना नहीं करना पड़ता है।

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