रोहित कुमार के पोस्ट में क्या?
रोहित कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा- स्विगी पर उन्होंने जो ऑर्डर किया था, वह लगातार लेट होता जा रहा था। इसके बाद उन्होंने डिलीवरी एजेंट को फोन किया, ताकि उसके आने का सही समय पता चल सके। रोहित के मुताबिक, डिलीवरी एजेंट ने उन्हें जल्द से जल्द ऑर्डर डिलीवर करने की बात कही। हालांकि, जब कुछ और मिनट गुजर जाने के बाद डिलीवरी नहीं मिली तो रोहित ने फिर उसे फोन लगाया। इस बार कृष्णप्पा ने घर तक पहुंचने के लिए पांच और मिनट का समय मांगा।
रोहित ने पोस्ट में लिखा, "आखिरकार 5-10 मिनट बाद उनके घर की घंटी बजी और वे तुरंत ही दरवाजे पर पहुंचे। रोहित ने कहा कि वे डिलीवरी एजेंट से ऑर्डर पहुंचाने में इतनी देरी के लिए निराशा जाहिर करने वाले थे। हालांकि, कृष्णप्पा को देखते ही उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।
बेंगलुरु के इस व्यक्ति ने बताया- "दरवाजा खोलने के बाद मैंने देखा कि एक 40 साल के करीब का एक व्यक्ति खुद को बैसाखी के सहारे संभालने की कोशिश कर रहा था।" रोहित ने कहा कि डिलीवरी एजेंट को देखने के बाद उन्हें यह लगा कि उसे घर तक ऑर्डर लाने में कितनी दिक्कत हुई होगी। इसलिए मैंने तुरंत ही कृष्णप्पा से माफी मांगी और बातचीत की कोशिश की।
रोहित ने बताया कि बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि कृष्णप्पा ने कोरोनावायरस महामारी के दौरान कैफे में मिली नौकरी गंवा दी थी। इसके बाद से ही वह शांत तरह से डिलीवरी का काम कर रहे हैं। कृष्णप्पा के तीन बच्चे हैं, जिन्हें खराब वित्तीय स्थितियों की वजह से वे शिक्षा के लिए बेंगलुरु नहीं ला पाए हैं।