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Demonetisation: नोटबंदी के छह वर्ष पूरे, जानें सरकार के इस फैसले ने बाजार में नकद लेन-देन पर क्या असर डाला?

Tue, 08 Nov 2022 03:00 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Demonetisation impact on economy: देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पांच और हजार रुपये के नोटों पर बैन लगने के बाद शुरुआती कुछ दिन मुश्किलों भरे थे। नोटबंदी के कुछ दिनों बाद जब दो हजार, पांच सौ और दो सौ रुपये के नोट चलन में तब जाकर स्थिति सामान्य हुई।
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नोटबंदी का नकद लेन-देन पर असर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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आज यानी आठ नवंबर की तारीख देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक अहम दिन के रूप में दर्ज है। आज ही के दिन छह वर्ष पूर्व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ और हजार रुपये के नोटों के चलन को वापस लेने की घोषणा की थी। आठ नवंबर की मध्य रात्रि से ही पांच सौ और हजार रुपये के नोट इतिहास बन गए थे और आगे चलकर चलन में दो हजार रुपये के नए गुलाबी नोट और पांच सौ रुपये के नए नोट आए। उसके कुछ समय बाद सौ और दो सौ रुपये के नोट भी प्रचलन में आए।

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आइए जानते हैं केंद्र सरकार के छह वर्ष पूर्व लिए गए नोटबंदी के फैसले ने देशभर में नकद लेन-देन पर क्या असर डाला है?

नोटबंदी के बाद कुछ दिनों तक बना रहा अफरा-तफरी का माहाैल

Demonetisation

देश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पांच सौ और हजार रुपये के नोटों पर बैन लगने के बाद शुरुआती कुछ दिन मुश्किलों भरे थे। नोटबंदी के कुछ दिनों बाद जब दो हजार, पांच सौ और दो सौ रुपये के नोट चलन में तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। उससे पहले लोगों को बैंकों की लंबी-लंबी कतार में लगकर अपने नोट बदलने पड़े। कई जगहों पर शादी-विवाह के मौके पर लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी थी। हालांकि एक बार जब बाजार में नए नोट चलन में आ गए तो धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो गई। नोटबंदी के बाद देश में करेंसी नोटों के प्रचलन में भी खासी तेजी देखने को मिली है। 

नोटबंदी के बावजूद पब्लिक डोमेन में मौजूद करेंसी में हुआ इजाफा

नोटबंदी के बाद बैंकों के सामने लगी लोगों की कतार। - फोटो : अमर उजाला

फिलहाल देश में करेंसी नोटों के कैश सर्कुलेशन में करीब 72 फीसदी का इजाफा हो चुका है। हालांकि इस दौरान डिजिटल और यूपीआई के माध्यम से भुगतान का नया चलन भी देश में शुरू हो गया। काेरोना काल के दौरान इसमें और बढ़ोतरी आई और वर्तमान में डिजिटल पेंमेंट लगभग-लगभग करेंसी नोटों की तरह ही सामान्य हो चुका है। नोटबंदी के बाद देश में पब्लिक डाेमेन में नकद के रूप में मौजूद करेंसी में भी बड़ा इजाफा देखने को मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक के 21 अक्तूबर 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार बीते छह वर्षों में देश में जनता के पास मौजूद करेंसी बढ़कर 30.88 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि विमुद्रीकरण के छह साल बाद और डिजिटल लेनदेन बढ़ने के बावजूद लोग अब भी नकदी का उपयोग बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। 

नोटबंदी के बाद से देश में करेंसी नोटों का चलन 72 फीसदी बढ़ा 

old currency

जनता के बीच नकद रूप में मौजूद 30.88 लाख करोड़ रुपये की करेंसी का आंकड़ा 4 नवंबर 2016 को समाप्त पखवाड़े के दौरान मौजूद करेंसी के स्तर से लगभग दोगुने पर पहुंच गया है। चार नवंबर 2016 को देश के जनता के बीच नकद रूप में 17.7 लाख करोड़ रुपये की करेंस मौजूद थी। जनता के पास मौजूद मुद्रा से तात्पर्य उन नोटों और सिक्कों से है जिनका उपयोग लोग लेन-देन करने, व्यापार निपटाने और सामान और सेवाओं की खरीदारी के लिए करते हैं। प्रचलन में मौजूद मुद्रा से बैंकों में मौजूद  नकदी को घटना के बाद यह आंकड़ा निकाला जाता है। 

डिजिटल रूप से भुगतान का चलन बढ़ने के बावजूद नकद पर लोगों का भरोसा कायम 

old notes

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार भुगतान के नए और सुविधाजनक डिजिटल विकल्पों के लोकप्रिय होने के बावजूद अर्थव्यवस्था में नकदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, पहले नोटबंदी और फिर कोरोना महामारी के दौरान लोग बड़े पैमाने पर नोटबंदी का उपयोग करने लगे हैं। 
 

डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद नकद माध्यम से रुपयों के लेनदेन में बढ़ोतरी

digital payment

वर्ष 2019 में आरबीआई की ओर से डिजिटल भुगतान से जुड़े एक अध्ययन ने भी इस बात पर आंशिक रूप से मुहर लगाई है। अध्ययन में कहा गया है है कि हालांकि हाल के वर्षों में डिजिटल भुगतान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, पर आंकड़ों के अनुसार इसी दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में प्रचलन में मौजूद मुद्रा में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अनुसार डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ने से देश में करेंसी के प्रचलन में कमी नहीं आई है। आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी के बाद भारत में डिजिटल तरीके से लेनदेन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है पर देश की जीडीपी के अनुपात में पारंपारिक रूप से यह फिर भी कम है। 
 

बीते दो दशकों में पहली बार कैश इन सर्कुलेशन बीती दिवाली पर घटा

जाली नोट - फोटो : Social Media

एक ताजा नोट में एसबीआई से जुड़े आर्थिक मामलों के जानकारों ने कहा है कि चलन में मौजूद मुद्रा (Currency in Circulation, CIC) में दिवाली के हफ्ते के दौरान 7600 करोड़ रुपये की कमी गई है। वर्ष 2009 के दिवाली सीजन को छोड़ दें तो यह पिछले दो दशकों में नकद के इस्तेमाल में आई सबसे बड़ी कमी है। माना जा रहा है वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की अशंका के बीच नकद के इस्तेमाल में यह कमी दर्ज की गई है।  

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भ्रष्टाचार और काले धन का प्रचलन घटाने के लिए लिया गया था नोटबंदी का फैसला 

नोटबंदी के बाद प्रचलन में आए नए नोट - फोटो : www.pexels.com

बता दें कि आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 रुपये और 1,000 रुपये मूल्यवर्ग के नोटों को वापस लेने के निर्णय की घोषणा की थी। सरकार की ओर से उस समय कहा गया था कि यह कदम अर्थव्यवस्था में भ्रष्टाचार और काले धन के प्रचलन को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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