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Investment: उतार-चढ़ाव के बीच बड़ी कंपनियों से बेहतर रिटर्न; देश के माइक्रो-ड्रामा बाजार में भी अपार संभावनाएं

Fri, 03 Oct 2025 05:33 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

निफ्टी-100 में बड़े कॉरपोरेट समूहों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। हम नए कॉन्ग्लोमरेट फंड के जरिये उसी ताकत को कैद करना चाहते हैं और निवेशकों को एक ऐसी थीम देना चाहते हैं जिसमें भारत की बदलती हुई विकास गाथा की झलक मिलती है। इसके अलावा मौजूदा सूरत-ए-हाल में भारत के माइक्रो ड्रामा बाजार में भी अपार संभावनाएं हैं। पढ़िए ये रिपोर्ट
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बड़ी कंपनियों में निवेश से बेहतर रिटर्न और सुरक्षा (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दुनिया में तनाव व भारी उथल-पुथल के बीच बड़े कॉरपोरेट समूहों की कंपनियों में निवेश से बेहतर रिटर्न व सुरक्षा मिलेगी। बड़े कॉरपोरेट (कॉन्ग्लोमरेट्स) के पास बड़ी पूंजी, कम पूंजी लागत व उभरते क्षेत्रों में विस्तार की क्षमता होती है। इससे उन्हें मंदी के दौर में टिके रहने और वैश्विक उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलती है।

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खुद को दोबारा गढ़ने की अद्भुत क्षमता
नुवामा के मुताबिक, निफ्टी-100 में बड़े कॉरपोरेट समूहों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक एस नरेन कहते हैं, देश के प्रमुख कारोबारी समूहों ने दशकों से खुद को दोबारा गढ़ने की अद्भुत क्षमता दिखाई है।

भारत की बदलती हुई विकास गाथा की झलक
चाहे वह संगठित खुदरा क्षेत्र की शुरुआत करना हो या फिर टेलीकॉम को बदलना हो। नवीनीकरण ऊर्जा हो या सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में प्रवेश करना हो। हम नए कॉन्ग्लोमरेट फंड के जरिये उसी ताकत को कैद करना चाहते हैं और निवेशकों को एक ऐसी थीम देना चाहते हैं जिसमें भारत की बदलती हुई विकास गाथा की झलक मिलती है।
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मंदी के समय प्रबंधन की क्षमता
यह फंड 71 बड़े समूहों को कवर करता है जिसमें 240 कंपनियां शामिल हैं। बड़े समूहों की मजबूत पूंजी और संतुलित खाता बही होता है। मंदी के समय प्रबंधन की क्षमता होती है। ये उभरते क्षेत्रों में तेजी से विस्तार करते हैं। इस फंड में एक हजार रुपये से एनएफओ के दौरान निवेश किया जा सकता है।

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उधारी की ऊंची वृद्धि पर दबाव, अस्थिरता से बेहतर ढंग से निपटना असंभव नहीं
इसलिए बड़ी कंपनियों में निवेश की सलाह वैश्विक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन में रुकावटें आ रही हैं। उधारी की ऊंची वृद्धि पर दबाव डाल रही हैं। विविध कारोबारी समूह इस अस्थिरता से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं।

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सस्ते डेटा, स्मार्टफोन तक पहुंच के कारण माइक्रो-ड्रामा बाजार में अपार संभावनाएं (सांकेतिक) - फोटो : AI Photo Grok
2030 तक 12 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा देश के माइक्रो-ड्रामा का बाजार
देश का शॉर्ट फॉर्म वीडियो यानी एसएफवी इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है। 2024 तक 30 करोड़ से अधिक यूजर्स माइक्रो-ड्रामा से जुड़ चुके हैं। यह बाजार 2030 तक 12 अरब डॉलर के पार जाएगा। यह सस्ते डेटा, स्मार्टफोन की पहुंच और क्षेत्रीय व जुड़ी हुई कहानियों की चाहत के मिश्रण से संभव हुई है। माइक्रो-ड्रामा का युग 90 सेकंड में सिमट गया है। इस क्रांति की अगुवाई कर रहा है टुकटुकी। जहां शेयरचैट का क्विक टीवी और कुकू टीवी शुरुआती दौर में आगे बढ़े, वहीं टुकटुकी ने केवल क्षेत्रीय माइक्रो-ड्रामा पर ध्यान केंद्रित करके अपनी अलग पहचान बनाई है। यह सिर्फ 29 रुपये में सस्ता पैक पेश किया है। यही कारण है कि कानपुर, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों के दर्शकों में इसकी पैठ बन रही है। इसकी संस्थापक अंशिता कुलश्रेष्ठा कहती हैं कि 86 फीसदी यूजर्स अपनी मातृभाषा में सामग्री पसंद करते हैं। 57 फीसदी शहरी दर्शक भी भारतीय भाषाओं की ओर झुकाव रखते हैं। 25 करोड़ भारतीय शॉर्ट-फॉर्म वीडियो प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। यह 2025 तक 65 करोड़ तक पहुंचेगा। इनमें से 70 फीसदी यूजर्स टियर-2 व टियर-3 शहरों से हैं। दिलचस्प है कि कुछ प्लेटफॉर्म पर 70 फीसदी यूजर्स महिलाएं हैं। 
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