अधिकांश भारतीय वित्तीय छूट या अन्य सेवाओं के प्रलोभन में बैंकों या बीमा कंपनियों के साथ निजी जानकारियां साझा कर देते हैं। आईटी कंपनी एक्सेंचर की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचनाओं की गोपनीयता पर को लेकर व्याप्त व्यापक चिंताओं के बावजूद 10 में से सात लोग कम कीमत के लालच में संवेदनशील जानकारियां साझा करते हैं। खास बात यह है कि इन जानकारियों में आय, निवास स्थान और जीवनशैली से जुड़ी बातें शामिल हैं।
28 देशों के 47,000 लोगों पर किए गए सर्वे में 2,000 भारतीय भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि 81 फीसदी भारतीय गोपनीयता को सर्वोपरी मानते हैं और अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को लेकर बेहद सतर्क होते हैं।
वैश्विक स्तर पर लालच में आकर निजी जानकारियां साझा करने में चीन (67 फीसदी) और भारत (69 फीसदी) अग्रणी पाए गए। हालांकि, यूरोप के लोग इन मामलों में सजग हैं और वे आसानी से ऐसा नहीं करते हैं।
प्रीमियम कम कराने को भी साझा करते हैं जानकारी
सर्वे के मुताबिक, इनमें से 93 फीसदी भारतीय जल्दी से ऋण की मंजूरी के लिए संवेदनशील जानकारियां साझा कर देते हैं। वहीं, 91 फीसदी लोग स्थान के आधार पर व्यक्तिगत छूट के लिए यह रुख अख्तियार करते हैं। वहीं, तीन-चौथाई भारतीय कार की बीमा प्रीमियम कम कराने के लिए ड्राइविंग संबंधी अपनी व्यक्तिगत जानकारियां आसानी से साझा कर देते हैं।
69 फीसदी लोग जीवन बीमा के लिए अपने स्वस्थ जीवनशैली की सूचनाएं दे देते हैं। इसके अलावा जिम की सदस्यता राशि में छूट और अपने निवास स्थान के आसपास विशेष सहूलियत आदि के लिए भी लोग ऐसा करते हैं।
67 फीसदी भारतीयों को पसंद है अपना बैंक
सर्वे में शामिल 67 फीसदी भारतीयों ने कहा कि उन्हें अपना बैंक पसंद हैं, जो वैश्विक औसत 62 फीसदी से थोड़ा अधिक है। 29 फीसदी भारतीय ग्राहक सप्ताह में कम-से-कम एक बार बैंक जाते हैं। वहीं, 76 फीसदी लोग अपने बैंक खातों की जांच के लिए स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं। करीब 66 फीसदी लोग उत्पादों या सेवाओं की जानकारी के लिए बैंकों/बीमा कंपनियों से जुड़ने को अपने उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।
डिजिटल तकनीक की भूमिका को तवज्जो नहीं
एक्सेंचर के प्रबंध निदेशक रिषि अरोरा का कहना है कि बेहतर कीमतों पर अधिक कुशस सेवाएं प्राप्त करने के लिए अधिकतर संख्या में लोग व्यक्तिगत जानकारियां आसानी से साझा कर देते हैं। साथ ही वे देश में वित्तीय सेवाओं के वितरण में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका को कम आंकते हैं।