असम में समीकंडक्टर निर्माण की सुविधा स्थापित करने पर टाटा समूह के दिग्गज रतन टाटा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उद्योगपति और टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने कहा है कि असम में सेमीकंडक्टर का निर्माण राज्य को वैश्विक मानचित्र उभरेगा। टाटा समूह ने असम के जागीरोड में सेमीकंडक्टर संयंत्र के लिए 27,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। रतन टाटा टाटा संस के आजीवन मानद चेयरमैन हैं।
इससे पहले मंगलवार को, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आश्वासन दिया था कि देश की पहली सेमीकंडक्टर चिप दिसंबर 2024 तक बनकर तैयार हो जाएगी और यह पहली मेड इन इंडिया चिप होगी। उन्होंने कहा था कि हमने सेमीकंडक्टर निर्माण का पहला प्रयास 1962 में ही किया था, लेकिन जब तक आपके पास सही नीति और सही दृढ़ विश्वास नहीं होगा, यह संभव नहीं हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी को विश्वास है कि विकासशील भारत के लिए हमें इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की आवश्यकता है। टीवी से लेकर पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, हर चीज में हमें सेमीकंडक्टर की जरूरत होती है।
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग अभी एक शुरुआती अवस्था में है। विभिन्न स्थानीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां इसकी विशाल क्षमता का दोहन करने का इरादा रखती हैं। टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड ("TSAT") के नाम से असम के मोरीगांव में एक सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करेगी। प्रतिदिन 48 मिलियन चिप्स उत्पादन की क्षमता वाली इस सुविधा का निर्माण 27,000 करोड़ रुपये से की लागत से किया जा रहा है।
यहां जिन सेगमेंट को कवर किया जाएगा वे ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक वाहन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और मोबाइल फोन हैं। शिलान्यास समारोह के दौरान मौजूद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि भारत में उद्योगों ने पिछली औद्योगिक क्रांतियों के दौरान व्यवसायों के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र को उचित स्थान नहीं दिया। अब इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।