बाजार नियामक सेबी ने कमोडिटी में निवेश करने वाली म्यूचुअल फंड कंपनियों को अब जोखिम बताने का आदेश दे दिया है। यह रिस्क ओ मीटर तुरंत लागू किया जाएगा। इसके लिए एक दिशा निर्देश जारी किया गया है। सेबी के मुताबि, जिस तरह शेयर्स में निवेश पर जोखिम बताया जाता है, उसी तरह से कमोडिटी में भी अब जोखिम बताना होगा। कमोडिटी के बेंचमार्क में 15 साल के उतार-चढ़ाव के आधार पर रिस्क ओ मीटर को लागू किया जाएगा।
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सेबी ने कहा कि अगर कमोडिटी में उतार-चढ़ाव 10 फीसदी से कम है तो जोखिम कम होगा। जबकि अगर 10 से 15 फीसदी का उतार-चढ़ाव होता है तो फिर इसे थोड़ा ज्यादा बताना होगा। अगर उतार-चढ़ाव 15-20 फीसदी होता है तो फिर से ज्यादा जोखिम वाले कॉलम में रखना होगा। इसी तरह से अगर उतार-चढ़ाव 20 फीसदी से अधिक हुआ तो इसे बहुत ज्यादा जोखिम वाले कॉलम में रखना होगा।
अक्तूबर, 2020 में सेबी ने कहा था कि सोने और इससे संबंधित संसाधनों में निवेश पर म्यूचुअल फंड स्कीम को 4 प्रकार के जोखिम को बताना होगा। अभी तक इस तरह की जानकारी शेयर के निवेश पर दी जाती थी। इसमें संबंधित जोखिम पर स्कीम में इसकी पूरी जानकारी देनी होती है।