उच्चतम न्यायालय मंगलवार को अपने रजिस्ट्री पर इस बात के लिए नाराजगी जाहिर की कि न्यायिक आदेश के बावजूद अदाणी पावर से संबंधित मामले को सूचीबद्ध नहीं किया गया। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने जैसे ही दिन की कार्यवाही शुरू की, उसने वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे से अदाणी पावर मामले के बारे में पूछा।
इस मामले में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की ओर से पेश दवे ने शीर्ष अदालत को बताया कि जब उनसे जुड़े वकील ने रजिस्ट्री से संपर्क किया और मामले के बारे में पूछा तो अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इसे सूचीबद्ध करने का कोई निर्देश नहीं है।
उसके बाद दवे ने बेंच से पूछा, अगर सरकार अदालत के आदेशों की अनदेखी करती है, तो इसे अवमानना माना जाता है, लेकिन जब रजिस्ट्री अदालत के आदेशों की अवहेलना करती है, तो क्या इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए?
पीठ ने जानना चाहा कि आखिर क्यों और किसके कहने पर रजिस्ट्री ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया। न्यायाधीशों ने पूछा, "क्यों? किसके इशारे पर? किसके निर्देश पर मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ?"। उन्होंने एक वरिष्ठ रजिस्ट्री अधिकारी को अदालत में बुलाया और चैंबर में उनके साथ मामले पर चर्चा की। इस मामले को अब बुधवार के दिन सुनवाई के लिए पहले मामले के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।