Adani Power: न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने अदाणी पावर राजस्थान लिमिटेड (एपीआरएल) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए फैसला सुनाया कि ऐसे आवेदन दाखिल कर विलंब भुगतान अधिभार (एलपीएस) की मांग करना उचित नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान सरकार के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनी जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से 1,300 करोड़ रुपये से अधिक विलंब भुगतान सरचार्ज की मांग करने वाली अदाणी पावर राजस्थान लिमिटेड की याचिका सोमवार को खारिज कर दी।
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न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने अदाणी पावर राजस्थान लिमिटेड (एपीआरएल) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए फैसला सुनाया कि ऐसे आवेदन दाखिल कर विलंब भुगतान अधिभार (एलपीएस) की मांग करना उचित नहीं है।
पीठ ने कहा, ''इस तरह की राहत (एलपीएस का दावा) ऐसे आवेदन में नहीं मांगी जा सकती है जिसे सुनवाई के दौरान स्पष्टीकरण के आवेदन के रूप में वर्णित किया गया था।"
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न्यायमूर्ति बोस ने फैसले के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ते हुए कहा कि एपीआरएल पर लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने को सुप्रीम कोर्ट कानूनी सहायता समिति के पास जमा किया जाएगा। फैसले की विस्तृत जानकारी आनी अभी बाकी है। शीर्ष अदालत ने 24 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने अदाणी पावर की उस याचिका का पुरजोर विरोध किया जिसमें उसने राज्य की बिजली वितरण कंपनी से 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का एलपीएस मांगा था। इस मामले में अभिषेक सिंघवी ने अदाणी पावर का प्रतिनिधित्व किया वहीं, वहीं दवे जेवीवीएनएल के लिए उपस्थित हुए।
पीठ के समक्ष अदाणी फर्म की याचिका तब खबरों में आई थी जब शीर्ष अदालत ने इसे पोस्ट करने के न्यायिक आदेश के बावजूद अनिर्दिष्ट कारणों से मामले को सूचीबद्ध नहीं करने के लिए अपनी रजिस्ट्री की खिंचाई की थी।