सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रिलायंस रिटेल लिमिटेड के साथ फ्यूचर रिटेल (एफआरएल) के 24,500 करोड़ रुपये के विलय सौदे पर मध्यस्थता की कार्यवाही को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है। सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने विलय सौदे पर मध्यस्थता की कार्यवाही को फिर से शुरू करने को कहा है।
पीठ ने कहा कि सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) ट्रिब्यूनल मध्यस्थता और सुलह अधिनियम के प्रावधान के तहत दायर एफआरएल की याचिका पर एक उचित आदेश पारित करेगा। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने फ्यूचर ग्रुप और अमेजन को संयुक्त रूप से दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध करने के लिए कहा था कि वह पहले अमेजन की याचिकाओं पर सुनवाई करे, जो एफआरएल की संपत्ति के संरक्षण से संबंधित है। अमेजन ने दिल्ली हाईकोर्ट के 5 जनवरी के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।
उल्लेखनीय है कि रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप (एफआरएल) के बीच 24,713 करोड़ रुपये की डील को लेकर पूरा विवाद है। जिस पर अमेरिकी दिग्गज ई कॉमर्स कंपनी अमेजन विरोध जता रही है। अमेजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपील किया है कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड अपनी संपत्तियों को तब तक न बेचे जब तक विवाद खत्म नहीं हो जाता। अमेजन और फ्यूचर के बीच कानूनी विवाद उस समय और गहरा गया जब, अमेजन इस मामले को अक्तूबर, 2020 में एसआईएसी में ले गया।
इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या वह अमेजन की उस याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित कर सकता है कि ‘बिग बाजार दुकानों’ समेत फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) की संपत्तियों को तब तक अलग न किया जाए, जब तक कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा रिलायंस रिटेल के साथ इसके विलय पर विवाद हल नहीं किया जाता। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि एफआरएल दुकानों के मालिक उसके समक्ष पेश नहीं हुए हैं और सवाल यह है कि क्या मध्यस्थता का फैसला आने तक संपत्तियों को विमुख करने से रोकने का ऐसा कोई आदेश पारित किया जा सकता है। पीठ ने कहा था, अगर किरायेदार या मालिक हमारे समक्ष पेश नहीं हुए हैं तो हम कैसे उन्हें इन दुकानों का कब्जा लेने से रोकने का आदेश दे सकते हैं।