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Patanjali: 'दूसरे माफीनामे में उल्लेखनीय सुधार'; पतंजलि मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, अब 7 को सुनवाई

Tue, 30 Apr 2024 05:31 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Patanjali: पतंजलि मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि अब माफीनामे में नाम आ गए हैं। यह एक उल्लेखनीय सुधार है, हम इसकी सराहना करते हैं, भाषा पर्याप्त है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से अखबारों में बिना शर्त सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने के मामले में हुई प्रगति की मंगलवार को सराहना की। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामदेव, बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि माफी की भाषा पर्याप्त है और इसमें नाम भी हैं। 

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न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि दूसरी माफी किसकी जांच को लेकर है। उल्लेखनीय सुधार हुआ है, हम इसकी सराहना करते हैं। अब आखिरकार वे समझ गए हैं।' उन्होंने कहा कि पहले जब माफीनामा प्रकाशित किया गया था, तो केवल कंपनी का नाम था। न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, "अब नाम आ गए हैं। यह एक उल्लेखनीय सुधार है, हम इसकी सराहना करते हैं, भाषा पर्याप्त है।" सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कंपनी के वकील से पूछा कि उन्होंने अखबारों में प्रकाशित माफीनामा क्यों ई-फाइल किया जबकि अदालत ने 23 अप्रैल को विशेष रूप से मूल प्रति दाखिल करने को कहा था। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, ''यह हमारे आदेश का अनुपालन नहीं है।"

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी के वकील ने माना है कि उनके वकील को अदालत द्वारा पारित आदेशों के बारे में कुछ गलतफहमी हुई है और प्रत्येक अखबार के मूल पृष्ठ को दाखिल करके आदेश का पालन करने का एक और अवसर दिया जाना चाहिए जिसमें सार्वजनिक माफी प्रकाशित की गई है।
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पीठ ने मामले की सुनवाई सात मई के लिए स्थगित करते हुए कहा, "रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि जब भी यह दस्तावेज दाखिल किया जाए उसे स्वीकार किया जाए।" रोहतगी ने मामले में अगली सुनवाई के लिए रामदेव और बालकृष्ण को निजी पेशी से छूट देने का अनुरोध किया।    पीठ ने कहा, ''यह छूट सुनवाई की अगली तारीख तक सीमित है।" 

शीर्ष अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा 2022 में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कोविड टीकाकरण अभियान और चिकित्सा की आधुनिक प्रणालियों को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है। शीर्ष अदालत ने 23 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि अखबारों में प्रकाशित सार्वजनिक माफीनामा रिकॉर्ड में नहीं है और उसे दो दिनों के भीतर दायर करने को कहा था।

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