एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कर्ज में डूबी निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार से लिखित भरोसे की मांग की है।
रजनीश कुमार ने कहा कि जेट एयरवेज को कर्ज देने वाले अधिकतर बैंक समाधान योजना के खिलाफ हैं। कंपनी के प्रवर्तक प्रक्रिया शुरू करने की तय शर्तों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। मेरे लिए भी यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला है और एसबीआई बोर्ड भी इस पर सहज महसूस नहीं कर पा रहा है।
आगे कहा कि बिना सरकारी भरोसे के कंपनी की समाधान योजना को मंजूरी देना बैंक की साख पर जोखिम पैदा कर सकता है। लिहाजा उड्डयन मंत्रालय के वित्त सेवा विभाग को बैंक के लिए समर्थन पत्र जारी करना होगा।
8,000 करोड़ का कर्ज
जेट एयरवेज ने एसबीआई की अगुवाई वाले बैंक समूह से 8,000 करोड़ का कर्ज लिया है। इसके अलावा वेंडर्स के भी 25 हजार करोड़ बकाया हैं। बकाया बढ़ने पर 17 अप्रैल, 2019 से कंपनी की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
एसबीआई प्रमुख ने कहा, जेट एयरवेज के दोबारा उड़ान भरने की उम्मीद बेहद कम है। कंपनी के पास सभी विमान लीज पर थे, जो वापस ले लिए गए हैं। अन्य कोई संपत्ति है नहीं, जिससे एयरलाइंस को दोबारा खड़ा किया जा सके।