फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिपोर्ट में दावा: 2025-26 में 10.4% बढ़ेगा सकल कर संग्रह, सरकार को मिलेंगे 41 लाख करोड़

Sat, 25 Jan 2025 06:48 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट के मुताबिक, सकल कर संग्रह के अनुमान में वृद्धि राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सतत आर्थिक सुधार और प्रभावी राजस्व उपायों के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, संभावित राहत उपायों के कारण आयकर संग्रह कम होने की वजह से 2025-26 में प्रत्यक्ष कर राजस्व 9.6 फीसदी की धीमी रफ्तार से बढ़कर 23.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आर्थिक गतिविधियों में सुधार के कारण 2025-26 में भी कर संग्रह के रूप में सरकार की कमाई मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। केयरएज रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा, अगले वित्त वर्ष में कर वसूली अच्छी रहेगी। सकल कर राजस्व 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 41.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है। बढ़ोतरी की यह रफ्तार 2025-26 के लिए अनुमानित 10.3 फीसदी की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि से थोड़ा अधिक है। शुद्ध कर राजस्व के रूप में सरकार की झोली में 28.2 लाख करोड़ रुपये आ सकते हैं।  

विज्ञापन


रिपोर्ट के मुताबिक, सकल कर संग्रह के अनुमान में वृद्धि राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सतत आर्थिक सुधार और प्रभावी राजस्व उपायों के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, संभावित राहत उपायों के कारण आयकर संग्रह कम होने की वजह से 2025-26 में प्रत्यक्ष कर राजस्व 9.6 फीसदी की धीमी रफ्तार से बढ़कर 23.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है। आर्थिक वृद्धि में सुधार के कारण कॉरपोरेट कर संग्रह में भी एक साल पहले की तुलना में 11.4 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

जीएसटी वसूली 11.8 लाख करोड़
अप्रत्यक्ष कर वसूली के रूप में सरकार को 18.1 लाख करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है, जो सालाना आधार पर 11.9 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। इसमें जीएसटी का योगदान 11.4 फीसदी बढ़कर 11.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है।

  • खाद्य तेल पर उच्च टैरिफ के कारण सीमा शुल्क संग्रह में भी 20 फीसदी की मजबूत वृद्धि की संभावना है। घरेलू उद्योगों के लिए सुरक्षात्मक उपायों से राजस्व में और वृद्धि हो सकती है।

आरबीआई से सरकार को कम मिलेगा लाभांश

विज्ञापन

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में गैर-कर राजस्व 9.8 फीसदी घटकर 4.8 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। आरबीआई से सरकार को मिलने वाला लाभांश 1.1 लाख करोड़ से 1.3 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है, जो बीते वित्त वर्ष के 2.1 लाख करोड़ रुपये से काफी कम है।

  • विनिवेश से सरकार को अब तक 86 अरब रुपये ही मिले हैं। आईडीबीआई बैंक व शिपिंग कॉरपोरेशन की बिक्री से विनिवेश लक्ष्य हासिल करना संभव है।

सब्सिडी खर्च: 4.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
सब्सिडी पर सरकार को खर्च चालू वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 4.1-4.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है। यह 3.8 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने रिपोर्ट में कहा, सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ने की प्रमुख वजह खाद्य और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च करना है। इसके अलावा, भंडारण और परिवहन की ऊंची लागत भी सब्सिडी खर्च बढ़ा रही है।

  • विपणन वर्ष 2025-26 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि के बाद बजट आवंटन करीब 10 फीसदी से अधिक होने का अनुमान है।
  • डॉलर में मजबूती के कारण आयात लागत बढ़ने से अकेले उर्वरक सब्सिडी का बजट 9-10 फीसदी बढ़ सकता है।

2025-26 में घटेगा सरकारी खजाने पर बोझ
अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 में सब्सिडी का कुल बोझ कम होकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। माना जा रहा है कि खाद्य सब्सिडी में बड़ी गिरावट आएगी और यह 2-2.1 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकती है।

  • आयात लागत के निरंतर दबाव के कारण उर्वरक सब्सिडी 1.7-1.8 लाख करोड़ रह सकती है।

सकल कर्ज 14 लाख करोड़
चालू वित्त वर्ष में सरकार का सकल कर्ज 14.01 लाख करोड़ और शुद्ध उधारी 11.63 लाख करोड़ रह सकती है। अगले वित्त वर्ष में शुद्ध कर्ज घटकर 10.8 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें