आरबीआई ने रेपो दर में लगातार छठी बार कोई बदलाव नहीं किया है। इसके बावजूद होम लोन पर ब्याज दर पिछले साल की तुलना में कम है। ऐसे में अगर आप नया मकान खरीदना चाहते हैं या कोई पुराना होम लोन चुका रहे हैं तो ब्याज दरों का आकलन जरूर करें। इससे आप अच्छी-खासी रकम बचा सकते हैं। कालीचरण की रिपोर्ट...
कर्ज पिछले साल से सस्ता
अब क्या करें
होम लोन 2020 से पहले का है तो संभव है कि आप अधिक ब्याज चुका रहे हों। इससे बचने के लिए मौजूदा ब्याज दर का आकलन करें। अगर आप पर होम लोन का आधा से अधिक बकाया है और ब्याज दर आपकी मौजूदा पात्रता से 50-100 आधार अंक अधिक है तो रेपो लिंक्ड रिफाइनेंसिंग पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने मौजूदा होम लोन को किसी अन्य बैंक या कर्जदाता के पास हस्तांतरित करा सकते हैं। इससे बचत करने में मदद मिलेगी।
नए कर्जदार हैं तो
हर एक लाख पर बचा सकते हैं 6,500 रुपये
होम लोन भुगतान की अवधि 10 साल बची है और अगर आप ब्याज दर को 9.50 फीसदी से घटाकर 8.50 फीसदी तक ला सकते हैं तो हर एक लाख रुपये पर करीब 6,500 रुपये बचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, 30 लाख रुपये का होम लोन बकाया है तो 10 साल में 1.95 लाख बचा सकते हैं। यानी हर साल 19,500 रुपये। दरों में कमी का सिलसिला शुरू होने पर बचत में तेजी आएगी।
सरकारी बैंक से ऋण लेने वाले ध्यान दें
आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार ने कहा कि आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकारी बैंकों का बकाया कर्ज अब भी पुराने मानकों पर आधारित है। निजी बैंकों में 79 फीसदी कर्ज रेपो दर आधारित हैं। वहीं, 12 सरकारी बैंकों के सिर्फ 38% कर्ज ही रेपो आधारित हैं। आपने 2020 से पहले सरकारी बैंक से होम लोन लिया है तो पुराने मानदंडों की वजह से अधिक ब्याज चुका रहे होंगे।