रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल के कार्गो पहुंचने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह की खबरें 'पूरी तरह झूठी' हैं और कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हैं। रिलायंस ने ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पिछले लगभग तीन हफ्तों में उसकी जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल का कोई भी कार्गो नहीं आया है और जनवरी महीने में भी किसी रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी की कोई उम्मीद नहीं है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का दावा खारिज
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा कि ब्लूमबर्ग की वह रिपोर्ट गलत है, जिसमें दावा किया गया था कि 'रूसी तेल से लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं।' कंपनी ने जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल के कार्गो पहुंचने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह की खबरें 'पूरी तरह झूठी' हैं और कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली हैं।
तीन हफ्तों में कोई रूसी तेल का कार्गो नहीं आया
रिलायंस ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले कंपनी की ओर से दिए गए खंडन को कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया। RIL ने अपने बयान में कहा, 'ब्लूमबर्ग में प्रकाशित एक खबर, जिसमें कहा गया है कि ‘रूसी तेल से लदे तीन जहाज रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं’, पूरी तरह से असत्य है। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में पिछले लगभग तीन हफ्तों में रूसी तेल का कोई कार्गो नहीं आया है और जनवरी में किसी भी रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी की उम्मीद नहीं है।'
कंपनी ने आगे कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग से उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। RIL ने आगे कहा, 'हमें बहुत दुख है कि जो लोग निष्पक्ष पत्रकारिता में सबसे आगे होने का दावा करते हैं, उन्होंने जनवरी में डिलीवर होने वाले किसी भी रूसी तेल को खरीदने के RIL के इनकार को नजरअंदाज करना चुना और एक गलत रिपोर्ट प्रकाशित करके हमारी इमेज खराब की।'
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रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ा विवाद
यह असहमति ऐसे समय में सामने आई है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने अक्टूबर 2025 से रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे प्रमुख रूसी तेल उत्पादकों कंपनी पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधों के बाद रिलायंस ने कुछ समय के लिए रूसी तेल आयात रोक दिया था और बाद में घरेलू शोधन के लिए गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में रिलायंस के पहले के खंडन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह रिपोर्ट एनालिटिक्स फर्म केप्लर के टैंकर ट्रैकिंग डेटा पर आधारित है।
केप्लर के अनुसार दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात दो साल के निचले स्तर पर आ गया, जनवरी से इसमें सुधार की संभावना है।
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था?
ब्लूमबर्ग के अनुसार रूसी कच्चे तेल से भरे कम से कम तीन टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी को अपना अगला गंतव्य बता रहे थे, क्योंकि कंपनी ने घरेलू उत्पादन के लिए कुछ खरीददारी फिर से शुरू कर दी थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग 22 लाख बैरल यूराल्स क्रूड से लदे जहाज जामनगर कॉम्प्लेक्स को संकेत दे रहे थे और केप्लर के आंकड़ों के आधार पर इस महीने की शुरुआत में अपना माल पहुंचाने की उम्मीद थी।
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