सितंबर 2025 में लागू हुए 'जीएसटी 2.0' (GST 2.0) या 'जीएसटी बचत उत्सव' के बाद आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन साल 2026 की शुरुआत के साथ ही महंगाई का दबाव फिर से कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में दिखने लगा है। जहां एक ओर आवश्यक वस्तुएं सस्ती बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की नई राजकोषीय रणनीतियों और इनपुट लागत में वृद्धि के कारण 'सिन गुड्स', कमर्शियल एलपीजी और हाउसिंग सोसाइटी के मेंटेनेंस जैसे खर्चों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
1 फरवरी 2026 से जीएसटी मुआवजा उपकर की आधिकारिक समाप्ति के साथ ही सरकार ने राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए नए कानून पेश किए हैं। इसका सबसे बड़ा असर तंबाकू और सिगरेट की कीमतों पर पड़ा है। 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम 2025' के तहत अब सिगरेट पर 40% जीएसटी के साथ एक 'विशेष उत्पाद शुल्क' लगाया गया है, जो सिगरेट की लंबाई पर आधारित है।
महंगाई की यह नई लहर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में आई है।1 जनवरी 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 111 रुपये की भारी वृद्धि की गई है। हालांकि घरेलू गैस की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से रेस्तरां, होटल और कैंटीन की लागत बढ़ेगी, जिससे बाहर खाना खाना महंगा हो सकता है।
वहीं, शहरी मध्यम वर्ग के लिए एक 'छिपी हुई लागत' सामने आई है। जीएसटी अधिकारियों ने उन हाउसिंग सोसायटियों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है जहां मासिक रखरखाव शुल्क 7,500 रुपये प्रति सदस्य से अधिक है। यदि शुल्क इस सीमा से एक रुपये भी अधिक है, तो पूरी राशि पर 18% जीएसटी लागू होगा। यह नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई जैसे शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। पुरानी व्यवस्था (28% जीएसटी + उपकर) की तुलना में नई दरों (18% या 40% फ्लैट) ने कारों की कीमतों में भारी कमी की है। उदाहरण के लिए, छोटी कारों पर कर का बोझ 29% से घटकर 18% रह गया है।