वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर को कम करने और निवेश के लिए ज्यादा पूंजी आवंटित करने जैसे घरेलू कारकों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य डीके श्रीवास्तव ने कहा, शहरी खपत पिछड़ रही है, इसलिए व्यक्तिगत आयकर संरचना को दरों और कटौती दोनों के संदर्भ में तर्कसंगत बनाना चाहिए, ताकि खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा निम्न और मध्य आय वर्ग के हाथों में आ सके।
पूंजीगत खर्च को बढ़ाने की जरूरत: आरबीआई
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के सदस्य नागेश कुमार का मानना है कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने व इसे और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए पूंजीगत खर्च के साथ बुनियादी ढांचे में निवेश पर ध्यान देने की जरूरत है। बुनियादी ढांचे के खर्च को बनाए रखने और इसे आगे बढ़ाने से आर्थिक विकास को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
बुनियादी ढांचे का अगला संस्करण लाने की आवश्यकता
16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद के सदस्य डीके श्रीवास्तव ने कहा, अब समय आ गया है कि सरकार 5-6 साल पहले शुरू की गई बुनियादी ढांचा का अगला संस्करण लाए। यानी इसमें और ज्यादा तेजी लानी होगी। बजट में मौद्रिक पक्ष से कुछ समर्थन की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई दो बार में में ब्याज दरों में 0.5 फीसदी की कटौती कर सकता है।
विनिर्माण बढ़ाने को सीमा शुल्क में कटौती संभव : डेलॉय
डेलॉय इंडिया का कहना है कि सरकार स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फुटवियर उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर सीमा शुल्क घटा सकती है। अभी एक दर्जन से अधिक सीमा शुल्क दरें हैं। सरकार स्लैब की संख्या को घटाकर 4 या 5 करने पर विचार कर रही है।