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निवेश-बचत: सुरक्षित विरासत के लिए एचयूएफ बनाएं, टैक्स बचाएं; जानें कब और कैसे मिलेगी छूट

Mon, 20 Jan 2025 07:22 AM IST
दीपक कुमार शर्मा देवेन्द्र शर्मा, बोनस टीम

सार

अपनी विरासत की प्लानिंग के लिए हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का गठन अच्छा विकल्प है। इसके जरिये टैक्स में अच्छी खासी बचत कर सकते हैं। साथ ही, संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाएगी। ध्यान रखें...अगर गलत तरीके से टैक्स बचाने के लिए एचयूएफ का इस्तेमाल किया है तो टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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सरकारी नौकरी से रिटायर कानपुर के अमित मिश्रा को पेंशन मिलती है। दो शादीशुदा बेटे हैं। दोनों नौकरीपेशा हैं। परिवार को पुश्तैनी संपत्ति और व्यवसाय से भी अच्छी खासी कमाई हो रही है। सभी सदस्य अलग-अलग आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरते हैं। अमित को चार्टर्ड अकाउंट (सीए) ने सलाह दी कि आप हिन्दू अविभाजित परिवार यानी एचयूएफ का गठन कर लें तो पूरा परिवार काफी टैक्स बचा सकता है। इसके अलावा, कई और फायदे भी होंगे।

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हिन्दू सक्सेशन एक्ट-1956 के तहत एचयूएफ को एक कानूनी इकाई माना गया है। आयकर कानून-1961 में एचयूएफ को परिवार के भीतर एक अलग इकाई मानी गई है। जिस प्रकार परिवार के किसी सदस्य को आयकर की विभिन्न धाराओं में छूट और कटौती का लाभ मिलता है, उसी तरह का फायदा एचयूएफ को भी मिलता है।

ऐसे बनता है एचयूएफ
आयकर कानून में एचयूएफ की एक व्यापक परिभाषा तय की गई है। इसके तहत, जो लोग भारत में रह रहे हैं और ईसाई, पारसी, मुस्लिम एवं यहूदी नहीं हैं तो वे अपना एचयूएफ बना सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि सिख और जैन भी एचयूएफ बना सकते हैं। हिन्दू परिवार में शादी के बाद एचयूएफ स्वतः ही बन जाता है, लेकिन इसका फायदा उठाने के लिए आपको एचयूएफ रजिस्टर्ड करना होगा। इसके लिए एक घोषणा पत्र देना होगा। इसके जरिये आयकर विभाग से पैन कार्ड बनवाना होगा। पैन कार्ड बनते ही आपका एचयूएफ गठित हो जाएगा। एचयूएफ के पैन के जरिये आप बैंक में खाता खुलवा सकते हैं। एचयूएफ की आय को कहीं भी निवेश और खर्च कर सकते हैं।
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कब और कैसे मिलेगी छूट
एचयूएफ को छूट सिर्फ उसकी कमाई पर ही मिलेगी। अगर कोई सदस्य चाहे कि वह एचयूएफ में अपनी इनकम डालकर कर छूट प्राप्त कर ले, ऐसा नहीं होगा। एचयूएफ के जरिये टैक्स में कैसे बचत कर सकते हैं, इसे अमित के उदाहरण से समझते हैं।

  • मान लीजिए, अमित की पेंशन व अन्य निजी माध्यमों से सालाना आय 10 लाख रुपये है। पारिवारिक व्यवसाय और पुस्तैनी संपत्ति के किराये से 5 लाख रुपये की कमाई है। इस तरह, अमित की कुल सालाना आय 15 लाख रुपये हो जाएगी, जिससे वह ऊपरी टैक्स स्लैब में आ जाएंगे।
  • अमित विरासत से आय को एचयूएफ में शामिल कर सकते हैं। पुरानी कर व्यवस्था के हिसाब से 2.5 लाख तक की आय टैक्स फ्री है। बाकी 2.5 लाख पर जो 12,500 रुपये का टैक्स बनेगा, उस पर धारा-87ए के तहत रिबेट मिल जाएगा।
  • इस तरह, एचयूएफ की ओर रिटर्न भरकर अमित 5 लाख की कमाई को टैक्स फ्री कर सकते हैं।

ऐसे करता है काम
एचयूएफ में परिवार का सबसे बड़ा व्यक्ति कर्ता यानी प्रबंधक होता है। नियमों के तहत, परिवार की महिला अपने नाम पर एचयूएफ नहीं बना सकती है। वह सिर्फ अपने पिता के एचयूएफ की कर्ता बन सकती है। अगर अमित एचयूएफ बनाते हैं तो वह परिवार में वरिष्ठ होने के नाते इसके मुखिया होंगे। परिवार के जिन सदस्यों का खून का रिश्ता है, वे एचयूएफ के को-पार्सनर यानी संयुक्त उत्तराधिकारी होंगे। शादी के बाद शामिल हुए लोग सदस्य कहलाते हैं। इस तरह, अमित की दोनों बहुएं एचयूएफ की सदस्य होंगी। परिवार में जब कोई बच्चा पैदा होता है, तो वह एचयूएफ का सदस्य बन जाता है।

  • नियमों के तहत एचयूएफ में अपनी निजी संपत्ति को शामिल नहीं कर सकते। वसीयत या ट्रस्ट के जरिये या अन्य माध्यम से विरासत में मिली संपत्ति एचयूएफ में शामिल होती है। इस संपत्ति से होने वाली आय एचयूएफ की कमाई मानी जाएगी।
  • को-पार्सनर एचयूएफ में से अपना हिस्सा मांग सकता है, लेकिन सदस्य को यह अधिकार नहीं है। अगर संपत्ति का बंटवारा होता है, तो सदस्य को अपना हिस्सा मिल जाएगा।

जानिए...किसे बनाना चाहिए एचयूएफ
नेक्स्टजेन एस्टेट प्लानिंग सॉल्यूशंस के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. दीपक जैन कहते हैं कि एस्टेट प्लानिंग में एचयूएफ की अहम भूमिका होती है। इसके कई लाभ हैं, लेकिन आयकर में छूट इसका सबसे बड़ा फायदा है। एचयूएफ को उन सभी छूट और कटौतियों का लाभ मिलेगा, जो किसी व्यक्गित करदाता को मिलता है। जिन परिवार को विरासत की संपत्ति या बिजनेस से कमाई है, वे अपनी कर देनदारियां घटाने के लिए एचयूएफ बना सकते हैं।

  • सबसे अच्छा तरीका है कि शादी होते ही एचयूएफ बना लें। शादी में मिले उपहारों व माता-पिता से मिली संपत्ति को इसमें शामिल कर लें।
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