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SBI: वृद्धि दर संभावित उत्पादन से अधिक होने के कारण नीतिगत दरों में कटौती की संभावना नहीं, रिपोर्ट में दावा

Thu, 03 Oct 2024 03:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SBI Report: एसबीआई की रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक अमेरिका में फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती के निर्णय का अनुसरण नहीं करेगा। इसके बजाय, आरबीआई विकसित घरेलू आर्थिक स्थिति के आधार पर एक स्वतंत्र दृष्टिकोण अपना सकता है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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भारत में मजबूत आर्थिक वृद्धि होने के कारण रिजर्व बैंक (RBI)की ओर से आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में दरों में कटौती के एलान की संभावना नहीं है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI)ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय बैंक के निर्णयों को प्रभावित करने वाले प्राथमिक कारक घरेलू आर्थिक स्थितियां हैं। भारत में मजबूत आर्थिक वृद्धि दिख रही है, यह संभावित रूप से इसके दीर्घकालिक संभावित उत्पादन से अधिक है। ऐसे में दरों को बनाए रखने का पलड़ा भारी है। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों को कम करने के बजाय वर्तमान दरों पर बनाए रख सकता है।  

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एसबीआई की रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक अमेरिका में फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती के निर्णय का अनुसरण नहीं करेगा। इसके बजाय, आरबीआई विकसित घरेलू आर्थिक स्थिति के आधार पर एक स्वतंत्र दृष्टिकोण अपना सकता है। आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के रुख को तय करते समय स्थानीय कारकों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है।

इसके अलावा, रिपोर्ट ने भारत की बैंकिंग प्रणाली में ऋण और जमा के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पर प्रकाश डाला। रिपोर्ट में कहा गया कि ऋण वृद्धि जमा वृद्धि को प्रभावित करती है, जिसका अर्थ है कि ऋण मांग में गिरावट भविष्य में जमा में कमी ला सकती है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि जमा वृद्धि में कमी न आए, ऋण वृद्धि का मजबूत बने रहना महत्वपूर्ण है। यह तभी हो सकता है जब भारत का निवेश चक्र सक्रिय रहे, क्योंकि निवेश ऋण की मांग में इजाफा करता है।  व्यवसायों और उद्योगों को विस्तार के लिए ऋण की आवश्यकता होती है, और इससे बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से अधिक धन प्रवाहित होने से जमा राशि में वृद्धि होती है। 
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रिपोर्ट के अनुसार ऋण जमा का कारण बनता है और इसलिए ऋण में गिरावट से भविष्य में जमा में गिरावट आएगी। इसलिए, बैंकिंग क्षेत्र में स्वस्थ ऋण और जमा स्तरों को बनाए रखने के लिए एक मजबूत निवेश चक्र आवश्यक है। एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू विकास और निरंतर ऋण वृद्धि केंद्रीय बैंक को निकट भविष्य में दरों को स्थिर रखने के लिए प्रेरित कर सकती है। एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरबीआई का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर रहेगा कि भारत की आर्थिक गति वैश्विक कारकों से अत्यधिक प्रभावित हुए बिना जारी रहे। 

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