रिजर्व बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिये पर्सनल लोन के नियमों को गुरुवार को कड़ा कर दिया। संशोधित मानदंड के अनुसार वित्तीय संस्थानों के जोखिम भार (Risk Weights) में 25 प्रतिशत अंक की वृद्धि की गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से आने वाले समय में पर्सनल लोन लेना महंगा हो सकता है।
यह बदलाव आवास, शिक्षा और वाहन ऋण सहित कुछ उपभोक्ता ऋणों पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा सोने और सोने के आभूषणों से सुरक्षित ऋण पर भी ये नियम लागू नहीं होंगे। इन ऋणों पर 100 प्रतिशत जोखिम भार बना रहेगा। अधिक जोखिम भार का मतलब है कि जब असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण की बात आती है तो बैंकों को बफर के रूप में अधिक पैसा अलग रखना पड़ता है। सरल शब्दों में, एक उच्च जोखिम भार बैंकों की उधार क्षमता को प्रतिबंधित करता है।
हाल ही में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने उपभोक्ता ऋण के कुछ घटकों में उच्च वृद्धि को चिह्नित किया था और बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अपने आंतरिक निगरानी तंत्र को मजबूत करने, जोखिमों को कम करने और अपने हित में उपयुक्त सुरक्षा उपाय स्थापित करने की सलाह दी थी।
रिजर्व बैंक के बुलेटिन में गुरुवार को कहा गया है कि मौद्रिक नीतिगत कदमों और आपूर्ति पक्ष के हस्तक्षेपों के कारण खुदरा मुद्रास्फीति में नरमी आई है, लेकिन अभी चुनौतियां खत्म नहीं हुईं हैं और हमें मीलों का सफर तय करना है। नवंबर के बुलेटिन में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक लेख में यह भी कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था चालू तिमाही में धीमी गति के संकेत दे रही है क्योंकि विनिर्माण धीमा है, जबकि सेवा क्षेत्र की गतिविधि महामारी के बाद के विस्तार के अंत तक पहुंच गई है।