आरबीआई ने आगाह करते हुए कहा है कि महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़ी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने से राज्यों के खजाने पर काफी दबाव बढ़ेगा। इससे उनकी विकास कार्यों पर खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी। केंद्रीय बैंक ने ‘राज्यों के वित्त : 2023-24 के बजट का एक अध्ययन’ विषय पर जारी रिपोर्ट में कहा, समाज एवं उपभोक्ता के लिहाज से अहितकर वस्तुओं व सेवाओं, सब्सिडी और हस्तांतरण व गारंटी पर प्रावधान से राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति गंभीर स्थिति में पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन योजना को लागू करने और कुछ अन्य राज्यों के भी इसी दिशा में आगे बढ़ने से आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिहाज से खर्च करने की प्रदेश सरकारों की क्षमता सीमित हो जाएगी।
बड़ी चिंता
- पुरानी पेंशन व्यवस्था को अपनाना राज्यों के लिए पीछे जाने की दिशा में बड़ा कदम होगा। यह पिछले सुधारों के लाभ को कम करेगा व आने वाली पीढ़ियों के हितों से समझौता करेगा।
- अगर सभी राज्य ओपीएस व्यवस्था को अपनाते हैं तो कुल राजकोषीय बोझ राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) पर होने वाले खर्च का 4.5 गुना तक अधिक हो सकता है। अतिरिक्त बोझ 2060 तक सालाना जीडीपी के 0.9 फीसदी तक पहुंच जाएगा।
- समाज के नजरिये से अहितकर वस्तुओं-सेवाओं, सब्सिडी, हस्तांतरण और गारंटी के लिए अतिरिक्त प्रावधान राज्यों की वित्तीय स्थिति को गंभीर बना देगा। इससे दो वर्षों में हासिल समग्र राजकोषीय मजबूती बाधित होगी।
खजाने पर ऐसे बढ़ेगा बोझ
इससे पुरानी पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले सेवानिवृत्त लोगों के लिए पेंशन का बोझ बढ़ेगा। इन लोगों का अंतिम बैच 2040 के दशक की शुरुआत में सेवानिवृत्त हो सकता है। इसलिए, वे 2060 के दशक तक ओपीएस के तहत पेंशन प्राप्त करेंगे।
राज्यों पर कर्ज अखिल भारतीय स्तर से ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ राज्यों ने 2023-24 में राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी (राज्य सकल घरेलू उत्पाद) के चार फीसदी से अधिक करने का बजट रखा है, जबकि अखिल भारतीय औसत 3.1 फीसदी है। उनका कर्ज स्तर भी जीएसडीपी के 35 फीसदी से अधिक है। अखिल भारतीय औसत 27.6% है।
पुरानी व्यवस्था अपनाने वाले राज्य
राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब व हिमाचल प्रदेश ने अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के फैसले की जानकारी दी है।