महंगाई से निजात न मिलने के मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर ने बयान जारी किया। ग्राहकों को राहत क्यों नहीं मिल रही है? इस सवाल पर शीर्ष पदाधिकारी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतों का दबाव अधिक है। इस कारण ग्राहकों की जेब पर अधिक भार पड़ रहा है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में दिसंबर से लगातार गिरावट देखी जा रही है, लेकिन ग्राहकों को राहत नहीं मिल रही है। रिजर्व बैंक के शीर्ष पदाधिकारी (डिप्टी गवर्नर) के मुताबिक मुद्रास्फीति के पिछले चार महीने में सबसे निचले स्तर पर होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की कीमतों का दबाव बना हुआ है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के मुताबिक खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के दबाव के कारण मुद्रास्फीति चार फीसदी के दायरे में नहीं आ रही है। यही कारण है कि ग्राहकों को अधिक कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।
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मुद्रास्फीति चार महीने से लगातार घट रही है, लेकिन राहत नहीं मिलने का कारण क्या?
मुद्रास्फीति में तेजी से कमी न आने से जुड़े सवाल पर मंगलवार को जारी मार्च बुलेटिन में रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारी ने देश में 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' पर तस्वीर साफ की। आरबीआई ने कहा कि खाद्य कीमतों का दबाव इतना अधिक है कि खुदरा मुद्रास्फीति तेजी से कम होकर आरबीआई की तरफ से तय चार फीसदी के दायरे में नहीं आ रही है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के मुताबिक भले ही मुख्य मुद्रास्फीति में व्यापक नरमी दिख रही है। मुद्रास्फीति चार महीने से लगातार घट रही है, लेकिन छोटे आयाम वाले खाद्य मूल्य दबाव (Short Amplitude Food Price Pressure) लगातार बने हुए हैं।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर क्या बोले RBI के डिप्टी गवर्नर
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर देबब्रत पात्रा ने कहा कि दुनिया की कुछ सबसे लचीली अर्थव्यवस्थाओं में विकास दर धीमी हो रही है। आने वाले समय में गति और अधिक मंद पड़ने की आशंका है। इस बात के स्पष्ट संकेत भी मिल रहे हैं। पात्रा के मुताबिक संरचना से जुड़ी मांग और स्वस्थ कॉर्पोरेट और बैंक बैलेंस शीट भविष्य में विकास को गति देने वाली ताकतें बनेंगी। इस बुलेटिन के अंत में रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बुलेटिन आलेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं। यह भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।