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PMLA: जमानत पर PMLA के तहत प्रतिबंध स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के आड़े नहीं आ सकते, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

Sat, 21 Sep 2024 06:26 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

PMLA: न्यायाधीश ने कहा कि पीएमएलए जैसे कानूनों के तहत लगाए गए प्रतिबंध वहां "निष्प्रभावी" हो जाते हैं, जहां अभियुक्त को लंबे समय तक कारावास में रहना पड़ता है और मुकदमे में अत्यधिक देरी होती है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बंबई हाईकोर्ट ने 72 वर्षीय एक व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत कड़ी शर्तें अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं।

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न्यायमूर्ति माधव जामदार ने 19 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में मुकदमा, जिसके लिए आवेदक सूर्याजी जाधव को गिरफ्तार किया गया था, जल्द ही समाप्त होने की संभावना नहीं है और वह कैंसर से पीड़ित हैं। फैसले की प्रति शनिवार को उपलब्ध हुई।

न्यायाधीश ने कहा कि पीएमएलए जैसे कानूनों के तहत लगाए गए प्रतिबंध वहां "निष्प्रभावी" हो जाते हैं, जहां अभियुक्त को लंबे समय तक कारावास में रहना पड़ता है और मुकदमे में अत्यधिक देरी होती है।
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न्यायमूर्ति जामदार ने कहा, "पीएमएलए की धारा 45 जैसे प्रतिबंधात्मक वैधानिक प्रावधानों के बावजूद, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अभियुक्त के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जा सकता।"

पीएमएलए की धारा 45 के तहत, किसी अदालत को धन शोधन के मामले में किसी आरोपी को जमानत देते समय इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि यह मानने के लिए उचित आधार मौजूद हैं कि वह दोषी नहीं है, और/या 60 वर्ष से अधिक उम्र का है, या महिला है या बीमार या अशक्त है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की रक्षा करता है।

जाधव को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मार्च 2021 में पुणे स्थित शिवाजीराव भोसले सहकारी बैंक में कथित धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर और अन्य पर धन की हेराफेरी और ऋण के धोखाधड़ीपूर्ण वितरण का आरोप लगाया गया था। जाधव ने लंबी कैद और विलंबित सुनवाई के आधार पर जमानत मांगी थी।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा 250 से अधिक गवाहों से पूछताछ प्रस्तावित है तथा मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जाधव ने इस मामले में मिलने वाली अधिकतम सजा की आधी से अधिक अवधि पूरी कर ली है।

अदालत ने कहा, "ऐसी स्थिति में, अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए जमानत देने में वैधानिक प्रतिबंध अदालत के आड़े नहीं आएंगे।"

उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायालयों से अपेक्षा की जाती है कि वे पीएमएलए के तहत जमानत दिए जाने के खिलाफ विधायी नीति की सराहना करेंगे, लेकिन "ऐसे प्रावधानों की कठोरता तब समाप्त हो जाएगी, जब उचित समय के भीतर सुनवाई पूरी होने की कोई संभावना नहीं होगी और पहले से ही जेल में बिताई गई अवधि निर्धारित सजा के एक बड़े हिस्से से अधिक हो गई है।"

अदालत ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने पहले ही आरोपियों की कई संपत्तियों को कुर्क कर लिया है और वसूली कार्यवाही के तहत उन्हें बेच दिया है, जिससे अब तक 60 करोड़ रुपये बरामद हो चुके हैं। न्यायाधीश ने पांच लाख रुपये के मुचलके पर जाधव को जमानत देते हुए कहा, ‘‘आवेदक 72 वर्ष का है और कैंसर से पीड़ित है। इसलिए उसके भागने का खतरा नहीं दिखता।’’

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