फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कॉकरोच के बाद अब बाजार में आया गधी का दूध, हजारों में है कीमत

Sat, 11 May 2019 10:29 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
donkey milk - फोटो : Social Media
विज्ञापन

कॉकरोच के बाद अब बाजार में गधी का दूध भी बिकने लगा है। हालांकि इसकी पहुंच आम आदमी तक नहीं है, क्योंकि छटांक भर दूध खरीदने के लिए भी लोगों को बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। पूरे देश में फिलहाल गधी के दूध की मांग देखने को मिल रही है। 

पीने के अलावा त्वाचा निखारने का काम

गधी के दूध की मांग दिल्ली-एनसीआर के अलावा कोच्चि और पुणे तक देखने को मिल रही है। इस दूध से कंपनियां सौंदर्य उत्पाद बना कर भी बेच रही हैं, जिसकी महिलाओं के बीच काफी मांग है। 

बन रहे हैं यह उत्पाद

कंपनियां महिलाओं के लिए गधी के दूध से त्वचा निखारने वाली क्रीम, साबुन और शैंपू बना रही हैं। वहीं घरेलू मार्केट में यह सीधे तौर पर भी बिक रहा है। 

इतनी है कीमत

बड़े शहरों में गधी का दूध सात हजार रुपये प्रति लीटर की दर पर मिल रहा है। इसको मां के दूध के बराबर माना गया है। इसलिए यह नवजात शिशुओं के लिए भी उपयुक्त है। जिन बच्चों को गाय के दूध से एलर्जी है, उनको गधी का दूध दिया जा सकता है। इसके अलावा पेट की गड़बड़ी से परेशान और स्किन एलर्जी के मरीजों के लिए भी यह दूध काफी फायदेमंद होता है। खांसी, त्वचा रोग और पेट के इलाज के लिए लोग इसका प्रयोग करते हैं।

कृषि मंत्रालय ने की पहल

देश में गधी के दूध का व्यापार बढ़ाने के लिए कृषि मंत्रालय ने अपनी तरफ से पहल की है। इसके दूध का व्यापार बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने कृषि अनुसंधान परिषद से संभावना खोजने के लिए कहा है। हालांकि गधी का दूध भी ऊंटनी के दूध की तरह काफी कम समय में प्रयोग किया जा सकता है। वहीं देश में अभी इस तरह के दूध का उत्पादन काफी कम होता है।

महंगे हैं उत्पाद

इस दूध से बने कई उत्पाद काफी महंगे हैं। जैसे 200 एमएल का शैंपू 2400 रुपये, अर्थराइटिस की 88 ग्राम की क्रीमत 4840 रुपये और एक्जिमा की क्रीम 6136 रुपये में मिल रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

donkey milk soap - फोटो : Social Media

इतिहास में है जिक्र

गधी के दूध का महिलाओं द्वारा इस्तेमाल का जिक्र इतिहास में भी मिलता है। दो हजार साल पहले भी इसका इस्तेमाल होता था। ऐसा कहा जाता है मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा जो अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती थी, वो भी अपने निखार के लिए गधी के दूध का इस्तेमाल करती थी। 

किसानों को हो रही है कमाई

गधी का दूध बेचने से किसानों को भी अच्छी कमाई हो रही है। अगर किसी किसान के पास इस वक्त 10 से 12 जानवर हैं तो वो आसानी से एक महीने में 60 से 70 हजार रुपये कमा रहा है। कई किसान जानवर को अपने ग्राहकों के घर पर ले जाते हैं और उनके सामने दूध निकालते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह दूध केवल आठ से दस घंटे में ही प्रयोग किया जा सकता है। 

वैज्ञानिक भी कर रहें है रिसर्च

गधी के दूध का व्यापार बढ़ाने और किसानों की मदद करने के लिए कृषि वैज्ञानिक भी काफी रिसर्च कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि शोध के जरिए इसका उत्पादन बढ़ाकर के किसानों की मदद की जा सकती है।

हिसार स्थित आईसीएआर के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइंस की वरिष्ठ वैज्ञानिक अनुराधा भारद्वाज का मानना है कि किसान इसका लाभ ले सकते हैं। कॉस्मेटिक के अलावा यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी काफी सही है। एक तो इसमें फैट की मात्रा कम होती है। आर्युवेद के कई डॉक्टर भी त्वचा रोगों जैसे कि एक्जिमा और सोरासिस में गधी के दूध का प्रयोग करने के लिए अपने मरीजों से कहते हैं। 

गधी का दूध अभी भी विश्व में सबसे महंगा दूध माना गया है। देश में अभी इसका प्रयोग शुरुआती स्तर पर है, हालांकि सरकार द्वारा बढ़ावा मिलने पर देश में भी इसके दाम और कम हो सकते हैं। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें