नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, "अगर हमें मध्यम आय के जाल से बाहर निकलना है तो निजी क्षेत्र को अपने निवेश और कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत अनुसंधान व विकास में अपना योगदान बढ़ाने की जरूरत है। बेरी ने कहा कि सतत वृद्धि के पथ पर हमारा नेतृत्व करने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की है।"
नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने बुधवार को कहा कि सरकार समग्र विकास की सुविधा दे रही है लेकिन देश को सतत वृद्धि के पथ पर ले जाने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की है। बेरी ने पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निजी क्षेत्र का योगदान 40 प्रतिशत है, जबकि विकसित देशों में इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है।
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, "अगर हमें मध्यम आय के जाल से बाहर निकलना है तो निजी क्षेत्र को अपने निवेश और कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत अनुसंधान व विकास में अपना योगदान बढ़ाने की जरूरत है। बेरी ने कहा कि सतत वृद्धि के पथ पर हमारा नेतृत्व करने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की है।"
उन्होंने कहा कि देश को सतत विकास के पथ पर ले जाने के लिए अमृत काल में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है। बेरी ने आगे कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी कामकाजी आबादी और लचीले भौतिक और डिजिटल संस्थानों के लाभ से भारत का टेक-ऑफ क्षण आ गया है।