शेयर बाजार में एक जून से भारी उठा-पटक देखने को मिल रहा है। कभी 2,600 अंक की तेजी तो कभी 4,000 अंक गिरावट। दरअसल, चुनावों के बाद से काफी कुछ अब भी अस्पष्ट है। ऐसे में निवेश करना चाहते हैं तो थोड़ा इंतजार करें। बाजार के आगे के प्रदर्शन की रणनीति बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
शेयर बाजार अभी भारी अस्थिरता से गुजर रहा है। ऐसे में अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो नई सरकार आने के कुछ समय तक इंतजार करें। दरअसल, म्यूचुअल फंड सहित जो संस्थागत निवेशक हैं, उनकी नई सरकार के मंत्रालयों के बंटवारे पर नजर है क्योंकि इस बार भाजपा की सीटें घटने से कुछ मंत्रालय उसके सहयोगी दल रखेंगे। इस बार भाजपा को सहयोगी दलों की शर्तों पर काम करना होगा, जिससे सरकार के लिए पिछले 10 वर्षों के ट्रैक पर काम करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बाजार के उछाल में नरमी भी आ सकता है या तेजी और ज्यादा हो सकती है।
सरकारी कंपनियों से दूरी बनाने में ही भलाई
जिस तरह की सरकार बनी है और जैसे मंत्रालयों का बंटवारा होगा, उसमें यह मुश्किल है कि सरकार सुधारों को उसी तरह से जारी रखेगी, जैसा पहले था। दो-तीन वर्षों में देखें तो सरकारी कंपनियों के शेयरों ने कई गुना रिटर्न दिया है। पर अब इसमें थोड़ा ठहराव आ सकता है। सरकारी कंपनियों के शेयर अभी ऊंचे भाव पर हैं। ऐसे में अगर निवेश इन शेयरों से थोड़ा दूरी बनाएं और इंतजार की रणनीति अपनाएं।
बेहतर शेयरों में जारी रख सकते हैं निवेश
विश्लेषकों का मानना है कि पांच साल तक राजनीतिक स्थिरता का संकेत है। कुछ दिनों से हो रहे उतार-चढ़ाव से पता चलता है कि अच्छे दिनों में निवेशकों को क्यों निवेशित रहना चाहिए और गिरावट का लाभ उठाते हुए इक्विटी में निवेश बढ़ाना चाहिए। सरकार में घटक दलों के शामिल होने से जोर कल्याणकारी योजनाओं पर होगा। इससे उपभोग और ग्रामीण मांग बढ़ेगी। यही वजह है कि एफएमसीजी बेहतर कर रहे हैं।
बेहतर शेयरों में जारी रख सकते हैं निवेश
विश्लेषकों का मानना है कि पांच साल तक राजनीतिक स्थिरता का संकेत है। कुछ दिनों से हो रहे उतार-चढ़ाव से पता चलता है कि अच्छे दिनों में निवेशकों को क्यों निवेशित रहना चाहिए और गिरावट का लाभ उठाते हुए इक्विटी में निवेश बढ़ाना चाहिए। सरकार में घटक दलों के शामिल होने से जोर कल्याणकारी योजनाओं पर होगा। इससे उपभोग और ग्रामीण मांग बढ़ेगी। यही वजह है कि एफएमसीजी बेहतर कर रहे हैं।
बड़ी गिरावट के बाद बाजार फिर पुराने स्तर पर
एक जून को मतदान के अंतिम चरण के बाद आए एग्जिट पोल पर तीन जून को बीएसई सेंसेक्स 2,507 अंक की तेजी के साथ 76,469 के सार्वकालिक उच्च स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों ने उस दिन जबरदस्त कमाई की। चुनाव नतीजों के बाद सेंसेक्स 6,000 अंक तक टूट गया, जिससे निवेशकों को 45 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ। हालांकि, शाम तक बाजार बंद होने पर घाटा कम होकर 31 लाख करोड़ रह गया। हालांकि, 3 जून से अब तक बाजार ने उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब घाटा करीब पूरा हो चुका है और सेंसेक्स फिर 76,000 पार पहुंच गया है।