एफएंडओ मूलरूप से ज्यादा जोखिम और ज्यादा मुनाफा देने वाला उत्पाद है। इसमें कम पूंजी में बड़े सौदे किए जा सकते हैं। बावजूद इसके अधिकतर निवेशकों के हाथ इसमें जले हैं। एफएंडओ एक प्रकार का ऐसा वित्तीय साधन है जो शेयर, कमोडिटी, मुद्रा में कम पूंजी में बड़ी पोजीशन लेने की मंजूरी देते हैं। यह ज्यादा मुनाफा और जोखिम वाला होता है, इसलिए इसमें पैसा तेजी से बनता है तो डूब भी जाता है। यह एक प्रकार के डेरिवेटिव अनुबंध होते हैं, जिनकी एक तय अवधि होती है। इस समय सीमा में इनकी कीमतों में शेयर के मूल्य के अनुसार बदलाव होते हैं। हर शेयर का फ्यूचर्स और ऑप्शन एक लॉट साइज में उपलब्ध होता है।
तीन लाख में खरीद सकते हैं 12 लाख का शेयर
आप किसी कंपनी का फ्यूचर्स या ऑप्शन लेते हैं, जिसका लॉट साइज 4,000 है। एफएंडओ के भाव में बदलाव की गणना लॉट साइज पर होती है। जितना बड़ा लॉट साइज, उतना बड़ा सौदा खड़ा हो सकता है। किसी शेयर का भाव 300 रुपये है तो कैश में 4,000 शेयर खरीदने के लिए 12 लाख रुपये देने होंगे। लेकिन इसका फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट महज 2-3 लाख रुपये में खरीदा जा सकता है। ऑप्शन में भी लॉट साइज 4,000 ही होगा, लेकिन कीमत शेयर की अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस पर होगी।
मान लीजिये शेयर का भाव 300 रुपये है और आप आपको लगता है कि यह शेयर 320 रुपये तक जा सकता है तो आप 320 की स्ट्राइक प्राइस वाला कॉल ऑप्शन खरीद लेते हैं, जिसका भाव 300 रुपये है, तो आपको 18,000 रुपये चुकाने होंगे। जैसे-जैसे स्टॉक का भाव बढ़ेगा तो ऑप्शन का मूल्य भी बढ़ेगा और यही आपका मुनाफा होगा।
भारी मुनाफे के साथ तगड़ा घाटा
फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग में जहां भारी मुनाफा होता है, वहीं तगड़ा नुकसान भी होता है। एफएंडओ में कमाई के बड़े मौके मिलते हैं लेकिन ज्यादातर लोग आक्रामता के साथ ट्रेड करते हैं। यानी बड़े-बड़े ट्रेड लेना व ज्यादा मुनाफे की उम्मीद करना। यही सोच ज्यादातर निवेशकों को नुकसान पहुंचाती है। फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग में हर समय भाव में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसलिए हमने कितने समय कितना पैसा कमाया यह मायने रखता है।
आनंद कदम, बाजार विशेषज्ञ ने कहा कि यदि आप कोई एफएंडओ ट्रेड लेते हैं और महज 10 मिनट में आपको 5 हजार का लाभ होता है तो उसे भुना लेना समझदारी है। क्योंकि, हो सकता है कि यह मुनाफा फिर से घाटे में बदल जाए।