पाकिस्तान इस समय भीषण आर्थिक और राजनैतिक संकट का सामना कर रहा है। लोगों के सामने खाने का संकट है। आज ही खबर आई थी कि मार्च महीने में पाकिस्तान की मुद्रास्फीति 35.37 प्रतिशत पर पहुंच गई। 50 साल में सबसे अधिक महंगाई दर है। इस बीच, पाकिस्तान ने अगले महीने रूसी कच्चे तेल के लिए अपना पहला ऑर्डर देने की योजना बनाई है। देश के पेट्रोलियम राज्य मंत्री मुसादिक मलिक ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिंस को देश तक पहुंचने में करीब चार सप्ताह लगेंगे।
मलिक ने दिया बयान
शनिवार को मलिक ने कहा कि रूस के साथ कई समझौते हुए हैं। उन्ही के तहत पाकिस्तान अगले महीने एक आदेश देगा। उन्होंने आगे बताया कि हालांकि, रूस से समुद्री रास्ते से तेल को पाकिस्तान पहुंचने में लगभग 26 से 27 दिनों का समय लगेगा। मलिक ने यह भी साफ किया कि रूस ने सरकार को आश्वासन दिया था कि वह पाकिस्तान को उतनी ही छूट दे रहा है जितनी किसी अन्य पड़ोसी देश को मिल रही है।
अमीरों और गरीबों के लिए अलग-अलग गैस दर पर कही ये बात
इस दौरान उन्होंने अमीरों और गरीबों के लिए अलग-अलग गैस दर के सरकार के फैसले के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज सुप्रीमो नवाज शरीफ के आदेश पर यह तंत्र तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि हमने देश को अमीर और गरीब की आबादी में बांट दिया ताकि अगर कोई गरीब महिला गैस की एक यूनिट का इस्तेमाल कर रही है तो वह एफ-7 या गुलबर्ग में एक महिला द्वारा भुगतान किए जाने वाले बिलों का एक चौथाई देगी। पेट्रोलियम सब्सिडी के मामले में भी ऐसा ही है। इसके तहत अमीरों को पेट्रोल के लिए 300 रुपये और गरीबों को पेट्रोल के लिए 200 रुपये देने होंगे।
रूस से कच्चे तेल की खरीद पर वार्ता के लिए मुसादिक मलिक ने की थी मॉस्को की यात्रा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्री इशाक डार ने बीते साल कहा था कि देश रूस से रियायती तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। इसके बाद, मुसादिक मलिक ने तेल और गैस की आपूर्ति सहित कई अन्य मुद्दों पर बातचीत के लिए मास्को की यात्रा की थी। उनकी यात्रा के बाद शहबाज सरकार ने घोषणा की थी कि वह रूस से कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल की रियायती दर पर खरीद करेगी।
गौरतलब है कि बीते साल दिसंबर में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने रूस से कच्चे तेल पर 30 प्रतिशत की छूट देने के लिए आग्रह किया था। जिसे रूस ने इनकार कर दिया था। इसके बाद इसी साल जनवरी में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल सौदे को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तान पहुंचा था। इस दौरान दोनों पक्षों ने मार्च के अंत तक एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सभी तकनीकी मुद्दों, बीमा, परिवहन और भुगतान तंत्र को संबोधित करने का फैसला किया था।
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पाकिस्तान में ऐसे बढ़ रही महंगाई
कैश-स्ट्रैप्ड पाकिस्तान 6.5 बिलियन अमरीकी डालर के आईएमएफ बेलआउट पैकेज को पुनर्जीवित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है जिसे वाशिंगटन स्थित वैश्विक ऋणदाता ने 2019 में मंजूरी दी थी। पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा खत्म हो चुका है। ऐसे में यहां की सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज चााहिए। इसके लिए जो शर्तें हैं, वो काफी कठिन हैं। इन शर्तों को पूरा करने के चक्कर में ही महंगाई दर बढ़ रही है। मार्च महीने में सीपीआई मुद्रास्फीति 50 साल के उच्च स्तर 35.37 प्रतिशत पर पहुंच गई है। जानकारों का कहना है कि अभी इसमें और बढ़ोतरी होगी। केंद्रीय बैंक ने बढ़ती मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए बेंचमार्क ब्याज दर को 300 बीपीएस को 20 फीसदी तक बढ़ा दिया है।