वित्त मंत्रालय ने रविवार को उन झूठी मीडिया रिपोर्ट की निंदा की, जिसमें केयर्न मामले में सरकारी बैंकों को विदेशों में स्थित विदेशी मुद्रा खातों से धन निकालने का आदेश देने का दावा किया गया है।
केंद्र सरकार ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व इस तरह के आदेश की खबर फैला रहे हैं। केयर्न को लेकर जारी कानूनी विवाद में इन खातों को जब्त किए जाने किए जाने की आशंका के चलते यह आदेश देने की बात कही गई थी। सरकार ने इसे गलत बताते हुए इसकी निंदा की है।
क्या कहा गया था मीडिया रिपार्टों में
हाल ही में ऐसी खबरें आईं थीं जिनमें दावा किया गया था कि केयर्न के साथ कानूनी विवाद में सरकारी बैंकों के विदेशी मुद्रा खातों के जब्त होने की आशंका को देखते हुए सरकार ने इन खातों से धन निकालने को कहा है। मीडिया में सूत्रों के अनुसार दी गई इन खबरों को भारत सरकार ने झूठा बताया। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से गलत तथ्यों पर आधारित हैं। भारत सरकार ने कहा कि ऐसा लगता है कि इसमें शामिल कुछ पक्ष ऐसे भ्रम फैलाने वाली रिपोर्टिंग की योजना बनाई है।
मध्यस्थता अदालत में चल रहा मामला
सरकार और ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी कंपनी के बीच एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में विवाद चल रहा है। इसका निर्णय केयर्न के पक्ष में गया है। मध्यस्थता अदालत ने कंपनी पर भारत सरकार द्वारा पिछली तिथि से प्रभावी कानून संशोधन के माध्यम से लगाए गए कर को निरस्त कर दिया है और सरकार को केयर्न एनर्जी का 1.2 अरब डॉलर चुकाने का आदेश दिया था।
केंद्र सरकार का कहना है कि किसी सरकार द्वारा लगाया गया कर उसके सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसे निजी मध्यस्थता अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। केयर्न ने पूर्व में कहा था कि यह फैसला बाध्यकारी है और वह विदेशों में भारतीय संपत्तियों को जब्त कर सकती है।
बाडमेर में तेल भंडार खोजा था
बता दें, केयर्न ने 1994 में भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश किया था। एक दशक बाद कंपनी ने राजस्थान में बड़ा तेल भंडार खोजा था। ब्रिटिश कंपनी 2006 में सूचीबद्ध हुई थी। पांच साल बाद सरकार ने पिछली तारीख के कर कानून के आधार पर केयर्न से पुनर्गठन के लिए 10,247 करोड़ रुपये का कर मय ब्याज और जुर्माना अदा करने को कहा था। केयर्न ने इसे हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी थी।