दूरसंचार विभाग की योजना पर अमल हुआ तो आने वाले समय में उपभोक्ता मोबाइल की तरह लैंडलाइन नंबर को भी अपने साथ रख सकेंगे। इतना ही नहीं आप जब चाहें अपनी सेवा प्रदाता कंपनी भी बदल सकेंगे। विभाग ने इस योजना पर प्रस्ताव तैयार करने के लिए दूरसंचार नियामक ट्राई के पास एक मसौदा भेजा है।
दूरसंचार अधिकारी ने बताया कि पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद लैंडलाइन नंबर को 10 अंक का कर दिया जाएगा। वर्तमान में लैंडलाइन नंबर सात से आठ अंक का होता है। इसे 10 डिजिट का बनाने के लिए एसटीडी कोड को भी इसमें शामिल कर दिया जाएगा। साथ ही पोर्टेबिलिटी के लिए उस क्षेत्र में अन्य सेवा प्रदाता कंपनियों की मौजूदगी भी जरूरी होगी। अभी मोबाइल पोर्ट कराने में 2 से 4 दिन लगते हैं, लेकिन फिक्स्ड लाइन को पोर्ट कराने में इससे ज्यादा समय लग सकता है।
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सिस्टम को करीब आठ साल पहले नवंबर 2010 में लागू किया गया था, जो मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ताओं का बड़ा हथियार साबित हुआ है। किसी भी कंपनी की सेवा से नाखुश उपभोक्ता इस सुविधा के जरिये अपनी सेवा प्रदाता कंपनी बदल लेता है। लिहाजा कंपनियां उपभोक्ताओं को खोने के डर से उन्हें बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश करती हैं।
मोबाइल पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू होने के बाद से देशभर में अब तक करोड़ों उपभोक्ता इसका लाभ उठा चुके हैं। ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2010 से मार्च 2019 तक देशभर में 42.84 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं ने अपने नंबर पोर्ट कराए हैं।