दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने पहले माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर में हिस्सेदारी खरीदी और कुछ समय में ही उसे 100 फीसदी खरीद लिया। बीते सोमवार को दोनों कंपनियों के बीच डील पर मुहर लगी। इस सौदे के छह महीने में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं इस बीच ऐसी खबरें भी चर्चा में हैं कि मस्क इस डील से कदम पीछे खींच सकते हैं। इसके लिए कई बड़ी वजहें बताई जा रही हैं।
टेस्ला के शेयर टूटा बड़ी वजह
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने 44 अरब डॉलर (3.37 लाख करोड़ रुपये) में ट्विटर को खरीदने की डील की है। अब वह इस सौदे को पूरा करने के लिए फंड जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ कारणों के चलते ऐसा संभव है कि मस्क इस डील को कैंसिल कर दें। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी कंपनी टेस्ला के शेयरों में आई गिरावट को बताया जा रहा है। गौरतलब है कि टेस्ला के शेयर इस डील पर मुहर लगने के बाद से बुरी तरह टूटे हैं।
इसलिए होगी मस्क को परेशानी
दरअसल, इस डील को कैंसिल करने की जो सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है वो यही है कि ट्विटर में उनकी हिस्सेदारी सामने आने के बाद उनकी कंपनी टेस्ला का शेयर लगातार नीचे गिर रहा है। बीते सोमवार को जब देर रात ट्विटर को खरीदने के उनके सौदे पर मुहर लगी थी उसके बाद अगले ही दिन टेस्ला का शेयर 12 फीसदी तक टूट गया था और कंपनी का बाजार पूंजीकरण 100 अरब डॉलर तक घट गया था। यानी डील की कीमत से दोगुने से ज्यादा घाटा मस्क को उठाना पड़ा। यहां बता दें कि डील में मस्क कुछ पैसे टेस्ला के शेयर को बेच कर भी देने वाले हैं. लेकिन, शेयर के प्राइस कम रहने से उनको यहां पर दिक्कत आ सकती है।
मस्क पहले भी कर चुके हैं कारनामा
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एलन मस्क चार साल पहले भी डील से पैर पीछे खींचने का कारनामा कर चुके हैं। उन्होंने See’s Candies को टक्कर देने के लिए कैंडी कंपनी खोलने की घोषणा की थी।लेकिन, बाद में वो इससे पीछे हट गए थे। ऐसे में इन बातों को भी हवा मिलने के बाद ट्विटर डील के कैंसिल होने की संभानाएं जताई जा रही हैं।
डील से पीछे हटे तो भरेंगे जुर्माना
यहां बता दें कि एलन मस्क और ट्विटर के बीच जो डील हुई है, उसके मुताबिक डील से पीछे हटने पर भारी-भरकम जुर्माना देना होगा। ये सिर्फ मस्क ही नहीं बल्कि ट्विटर पर भी लागू होता है। दोनों के बीच हुए एग्रीमेंट के अनुसार, इस डील से एलन मस्क या फिर ट्विटर में से कोई भी पीछे हटता है तो एक अरब डॉलर (7500 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है।