अरबपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अगले तीन सालों में ग्रीन एनर्जी में 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। इंटरनेशनल क्लाइमेट समिट को संबोधित करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि एनर्जी उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बनेगा। साल 2035 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज नेट जीरो कार्बन कंपनी हो जाएगी।
दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है जलवायु परिवर्तन
आगे उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन की कीमत कुछ सालों में कम होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। इसे नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए हमें ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से जाना होगा। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन फॉसिल एनर्जी का एक बेहतर विकल्प है। हमें क्लीन, ग्रीन और न्यू एनर्जी के दौर में आना होगा। 2035 तक नेट जीरो कार्बन कंपनी बनने के साथ रिलायंस का साल 2030 तक 100 GW रिन्यूएबल क्षमता सेटअप करने की योजना है। कंपनी अपनी आगे की योजना पर काम कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' का जिक्र करते हुए अंबानी ने कहा कि यह दोहरी रणनीति है इसमें एक तरफ भारत कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम होगी, दूसरी तरफ भारत वैश्विक प्रयासों की अगुवाई करके विश्व लीडर बनेगा। भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर मिशन की शुरूआत कर प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया को ग्रीन एनर्जी अपनाने का संदेश दिया है। देश ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 100 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का मुकाम हासिल कर लिया है। अब हम 2022 तक 175 गीगावाट के लक्ष्य की तरफ मजबूती से बढ़ रहे हैं। भारत न्यू एनर्जी में आत्मनिर्भर बनने की ओर है। फॉसिल एनर्जी पर मोटी रकम खर्च होती है।
उन्होंने बताया कि हमने जामनगर में 5,000 एकड़ में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स विकसित करना शुरू कर दिया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत अक्षय ऊर्जा निर्माण सुविधाओं में से एक होगी। इस परिसर में चार गीगा फैक्ट्रियां होंगी, जो अक्षय ऊर्जा के पूरे स्पेक्ट्रम को कवर करती हैं। पहला एक एकीकृत सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल कारखाना होगा। दूसरा एक उन्नत ऊर्जा भंडारण बैटरी कारखाना होगा। तीसरा ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर फैक्ट्री होगी। चौथा हाइड्रोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए एक ईंधन सेल कारखाना होगा।
उद्योगपति मुकेश अंबानी ने जून में हुई कंपनी की सालाना आम बैठक में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर कदम रखने की घोषणा की थी। उन्होंने सौर फोटोवोल्टिक सेल, हरित हाइड्रोजन, बिजली स्टोरेज बैटरी और फ्यूल सेल के विनिर्माण को लेकर अगले तीन साल में बड़ी क्षमता के चार विनिर्माण संयंत्र लगाने के लिए 75,000 करोड़ रुपये के निवेश का एलान किया था।
जून में अंबानी ने की थी एक गीगा फैक्ट्री बनाने की घोषणा
मालूम हो कि इसी साल जून में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स परियोजना के हिस्से के रूप में एनर्जी स्टोरेज के लिए एक गीगा फैक्टरी बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि 'हम नई और उन्नत इलेक्ट्रो-केमिकल प्रौद्योगिकियों की खोजबीन कर रहे हैं, जिनका उपयोग ग्रिड बैटरी के तौर पर ऊर्जा को स्टोर करने के लिए किया जा सकता हो। हम नई पीढ़ी की स्टोरेज और ग्रिड कनेक्टिविटी के माध्यम से चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए बैटरी प्रौद्योगिकी में वैश्विक लीडर्स के साथ सहयोग करेंगे।'