अगस्त 2024 के लिए भारत के आयात-निर्यात से जुड़े जो आंकड़े सामने आए हैं उस पर बाजार ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने निर्यात में भारत के लचीलेपन की प्रशंसा की। चैंबर ने अप्रैल से अगस्त 2024 के बीच कुल निर्यात में सालाना आधार पर 5.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को अहम बताया। इस अवधि के दौरान माल और सेवाओं के निर्यात का संचयी मूल्य 374.3 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जो 2023 की इसी अवधि में 350.1 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक है।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने इस वृद्धि का श्रेय इलेक्ट्रॉनिक सामान, चाय, कॉफी, मसालों और अनाज के बढ़ते निर्यात को दिया। उन्होंने भारत की आपूर्ति शृंखलाओं के मजबूत होने के साथ निर्यात में निरंतर मजबूती का आने का अनुमान जताया। अग्रवाल ने कहा, "हम चालू वित्त वर्ष में एक शानदार निर्यात वृद्धि की उम्मीद करते हैं। जैसे-जैसे भारत की आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होती जाती हैं, वैसे-वैसे चालू वित्त वर्ष में निर्यात भी बढ़ने की उम्मीद है।"
हालांकि, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) ने अगस्त के माल निर्यात आंकड़ों से जुड़ी अधिक सतर्क तस्वीर पेश की। अगस्त में सालाना आधार पर देश का 9 प्रतिशत से अधिक घटकर 34.71 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
FIEO के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने इस तीव्र गिरावट के पीछे का कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, कमोडिटी की गिरती कीमतों और रसद चुनौतियों को बताया है। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में व्यवधानों के साथ-साथ कच्चे तेल और धातु की कीमतों में गिरावट ने माल निर्यात को नुकसान पहुंचाया है। इसके अतिरिक्त, उच्च माल ढुलाई लागत और शिपिंग से जुड़ी कठिनाइयों ने कुछ निर्यातकों को घरेलू बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया है। कुमार ने कहा, "कच्चे तेल और धातु की कीमतों में गिरावट के साथ-साथ चल रहे अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवधानों ने भी निर्यात के मूल्य को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।"
इंजीनियरिंग क्षेत्र की ओर से आंकड़ों पर आशावादी प्रतिक्रिया आई। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) इंडिया के चेयरमैन अरुण कुमार गरोडिया ने बताया कि अगस्त 2024 में इंजीनियरिंग निर्यात में 4.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, और यह 9.44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। कुल मिलाकर, अप्रैल-अगस्त की अवधि के लिए इंजीनियरिंग वस्तुओं का का निर्यात 46.41 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें सालाना आधार पर 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, गरोडिया ने कहा कि अगर लोहा और इस्पात निर्यात में गिरावट नहीं होती, तो समग्र प्रदर्शन मजबूत हो सकता था, इसका कारण उन्होंने चीन से प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, भू-राजनीतिक संघर्षों और अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में संरक्षणवादी नीतियों को दिया।
उन्होने कहा कि, एफटीए का फायदा उठाकर सस्ते चीनी स्टील को भारत में डंप किया जा रहा है, इससे देश के कारोबारियों की चिंता बढ़ रही है। उन्होंने एफटीए मार्गों के माध्यम से भारत में चीनी स्टील के प्रवेश से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की समीक्षा का भी आग्रह किया। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए आगे का रास्ता वैश्विक बाजार की स्थितियों और घरेलू नीति हस्तक्षेप दोनों पर निर्भर करता है।