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Gastech: अगले दो दशकों में भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में 25% का योगदान देगा, गैसटेक में बोले हरदीप पुरी

Wed, 18 Sep 2024 11:55 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gastech: विजन, नवाचार और कार्रवाई के माध्यम से ऊर्जा में परिवर्तन विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम गैसटेक में वैश्विक ऊर्जा स्थिरता और तीव्र डीकार्बोनाइजेशन की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के ऊर्जा मंत्री हरदीप पुरी ने ह्यूस्टन में विश्व की ऊर्जा जरूरतों पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित एक बहुराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि अगले दो दशकों में भारत वैश्विक ऊर्जा मांग में 25 प्रतिशत का योगदान देगा।

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52वीं गैसटेक प्रदर्शनी और सम्मेलन मंगलवार को जॉर्ज आर ब्राउन कन्वेंशन सेंटर में भारत सहित विश्व के पांच प्रमुख ऊर्जा मंत्रियों की रणनीतिक अंतर्दृष्टि के साथ शुरू हुआ।

'विजन, नवाचार और कार्रवाई के माध्यम से ऊर्जा में परिवर्तन' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में वैश्विक ऊर्जा स्थिरता और तीव्र डीकार्बोनाइजेशन की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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अपने मुख्य भाषण में केन्द्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की बढ़ती प्रभावशाली भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "यदि वैश्विक मांग एक प्रतिशत बढ़ रही है, तो हमारी मांग तीन गुना तेजी से बढ़ रही है। अगले दो दशकों में भारत ऊर्जा मांग में वैश्विक वृद्धि में 25 प्रतिशत का योगदान देगा।"

उन्होंने भारत की चुनौती को "ऊर्जा त्रिविधता" के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने उपलब्धता, सामर्थ्य और सफल हरित परिवर्तन के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। पुरी ने कहा, "हमें हरित परिवर्तन को प्रबंधित करने और इसमें सफलता प्राप्त करने की अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है।"

सम्मेलन के उद्घाटन मंत्रिस्तरीय पैनल में अमेरिका, भारत, मिस्र, नाइजीरिया और तुर्की के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और उद्योग चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

अमेरिका के ऊर्जा संसाधन मामलों के सहायक विदेश मंत्री जेफ्री पायट ने वैश्विक ऊर्जा प्रवाह को स्थिर करने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका पर जोर दिया।

पियाट ने कहा, "अमेरिका की अभूतपूर्व ऊर्जा प्रचुरता के साथ हम अपने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करते हुए एक केंद्रीय वैश्विक भूमिका निभाने की स्थिति में हैं।"

मिस्र के मंत्री करीम बदावी ने एक प्रमुख ऊर्जा प्रवेशद्वार के रूप में अपने देश की रणनीतिक स्थिति के बारे में बात की तथा निवेश-अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। नाइजीरिया के पेट्रोलियम संसाधन राज्य मंत्री माननीय एकपेरिकपे एकपो ने अफ्रीकी राष्ट्र के अद्वितीय प्राकृतिक गैस अवसरों को रेखांकित किया।

शेवरॉन के सीईओ माइक विर्थ और चेनियर एनर्जी के सीईओ जैक फुस्को सहित उद्योग जगत के नेताओं ने वैश्विक रणनीतियों पर भारत की ऊर्जा नीतियों के प्रभाव पर चर्चा की।

विर्थ ने ऊर्जा भविष्य पर संवाद का आह्वान किया, जबकि फुस्को ने उभरती ऊर्जा मांगों और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अनुकूलनीय व्यवसाय मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा प्राकृतिक गैस और एलएनजी पर भी केंद्रित रही, जिसमें भारत के महत्वपूर्ण निवेश वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आकार दे रहे हैं।

कोनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। हाइड्रोजन सम्मेलन और जलवायु तकनीक व एआई सम्मेलन ने हाइड्रोजन और नवीन ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारत के बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित किया।

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