Indian Economy: आर्थिक मामलों के जानकार प्रो. अरुण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि ताजा आंकड़ों में अर्थव्यवस्था में बेहतर होने के संकेत मिलते हैं, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि इन आंकड़ों में केवल संगठित क्षेत्र के आंकड़े ही शामिल हैं...
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने वर्तमान वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.4 फीसदी की बेहतर वृद्धि होने का अनुमान लगाया है। बुधवार को जारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों में भी अर्थव्यवस्था के बेहतर होने का संकेत मिलता है। वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 13.5 फीसदी की बेहतरीन बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पूर्व वर्ष में यह वृद्धि 20.1 फीसदी रही थी। भारतीय अर्थव्यवस्था में यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संकट के दौर से गुजर रही हैं और कई देशों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
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निर्माण क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में अभी भी बेहतर योगदान दे रहा है। पहली तिमाही में भी निर्माण क्षेत्र में 16.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि दूसरे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में केवल 4.8 फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज की गई है। यह अर्थव्यवस्था के लिए कमजोर कड़ी है। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ इस सेक्टर में ज्यादा वृद्धि को बेहतर मानते हैं। अर्थव्यवस्था के कोर सेक्टर में पिछली छमाही की तुलना में अब तक की कमजोर वृद्धि दर्ज की गई है।
संगठित क्षेत्र की मजबूती दिखा रहे आंकड़े
आर्थिक मामलों के जानकार प्रो. अरुण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि ताजा आंकड़ों में अर्थव्यवस्था में बेहतर होने के संकेत मिलते हैं, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि इन आंकड़ों में केवल संगठित क्षेत्र के आंकड़े ही शामिल हैं। असंगठित क्षेत्र के आंकड़ों के शामिल करने के बाद यह वृद्धि कमजोर पड़ जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात असंगठित क्षेत्र है, जहां आज भी कामकाज पूर्व कोरोना स्तर पर नहीं आ सका है। इस सेक्टर में भारत के सबसे ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। इस समय संगठित क्षेत्र की बढ़त का सबसे बड़ा कारण यही है कि असंगठित क्षेत्र में निर्माण कमजोर पड़ रहा है, मजबूरन लोग अपनी जरूरतों के लिए संगठित क्षेत्र के उत्पाद खरीद रहे हैं।
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लेकिन असंगठित क्षेत्र के कमजोर पड़ने से उनके हाथों में पैसा नहीं पहुंचेगा, और लंबी अवधि में उनकी खरीद क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी। इससे ये उपभोक्ता संगठित क्षेत्र के उत्पाद भी खरीदने में असमर्थ होंगे। इससे संगठित क्षेत्र के भी कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाएगी। सरकार को असंगठित क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।