इन कारणों से हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे चीन के रास्ते
सरकार की फास्ट-ट्रैकिंग परियोजना से भारत को एक अलग फायदा होगा। चीन अब भी बाहरी दुनिया के लिए काफी हद तक बंद है। उसकी नीतियों के बारे में समझना लोकतांत्रिक देशों से ताल्लुक रखने वाली कंपनियों के लिए टेढ़ी खीर है। इसी कारण कंपनियां तेजी से चीन-प्लस-वन नीति अपना रही हैं। अन्य देशों को अपने व्यवसायों और आपूर्ति में विविधता लाने के लिए विस्तार के माध्यम की तलाश है।
एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सस्ते श्रम के साथ ही बड़े पैमाने पर अंग्रेजी बोलने वाले श्रमिकों का एक प्रतिभा पूल भी प्रदान करती है। ऐसे में सिर्फ सीमित बुनियादी ढांचे की कमजोरी और लाल फीताशाही ही उसे कई निवेशकों से दूर रखती है। पीएम गतिशक्ति मिशन इस कमी को पूरा करेगा और दुनियाभर की कंपनियों के सामने भरोसेमंद विकल्प बनाएगा।
लागत की प्रतिस्पर्धा ही ड्रैगन को परास्त करने का एकमात्र तरीका
प्रतिस्पर्धा में ड्रैगन को परास्त करने का एकमात्र तरीका है लागत पर काम करना। लागत कम करने से ही चीन को पीछे कर भारत दुनियाभर की कंपनियों की पहली पसंद बन सकेगा। गतिशक्ति देश की लंबाई और चौड़ाई में माल और निर्मित घटकों के प्रवाह को आसान बनाने और रफ्तार बढ़ाने का जरिया बनेगी।
कोविड महामारी ने धीमी की रफ्तार, लेकिन थमी नहीं भारत की प्रगति
सत्ता में आने के बाद से ही मोदी सरकार आधारभूत ढांचे का विकास कर ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। 2019 में आई कोविड-19 महामारी के कारण दो साल तक आर्थिक प्रगति कुछ धीमी हुई, लेकिन प्रगति की रफ्तार थमी नहीं। तब भी सरकार ने अपना काम जारी रखा। उस समय देश के लाखों कारखानों ने समय के अनुरूप खुद को ढालकर कर्मचारियों को रोजगार उपलब्ध कराना जारी रखा।
हाल ही में एप्पल ने अपने आईफोन 14 का निर्माण भारत मकरने की घोषणा की है। इससे पहले 2018 में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन निर्माता कंपनी की स्थापना की थी। देश की ही ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने दुनिया की सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली फैक्टरी को स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार लोगों को दूरदराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है।