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SBI : एसबीआई ने कहा- मुफ्त रेवड़ियां टाइम बम, सुप्रीम कोर्ट लगाए अंकुश, महंगे पड़ेंगे ऐसे वादे

Tue, 04 Oct 2022 05:41 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च डेस्क, मुंबई।

सार

SBI : राज्यों की आकस्मिक देनदारी भी तेजी से बढ़ कर 2022 में बजट का 4.5 प्रतिशत हो चुकी हैं। इनमें बजट के अलावा लिया उधार, सरकारी संस्थाओं के लोन और इनके लिए सरकारों की गारंटी शामिल हैं। यूपी में यह लोन गारंटी 6.3 प्रतिशत है।
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SBI - फोटो : iStock
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विस्तार
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SBI : स्टेट बैंक ने चुनावी फायदे के लिए मुफ्त रेवड़ियां बांटने की होड़ पर चिंता जताते हुए इसे टाइम बम बताया है। साथ ही, मुफ्त उपहार का विश्लेषण करने वाली सुप्रीम कोर्ट की समिति को ऐसी कल्याणकारी योजनाओं पर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) या कुल कर संग्रह की एक फीसदी सीमा तय करने का सुझाव दिया है।

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एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष की ओर से जारी रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में उदाहरण देते हुए बताया गया कि झारखंड, राजस्थान व छत्तीसगढ़ पुरानी पेंशन स्कीम वापस ला चुके हैं। अब कई अन्य राज्य भी इस पर विचार कर रहे हैं। सभी ऐसा करें, तो पेंशन पर ही हर साल 31.04 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। कई राजनीतिक दल मुफ्त स्कीमों का वादा कर रहे हैं। इन पर राज्यों के कुल कर संग्रह का 10 प्रतिशत खर्च होगा।

  • एसबीआई ने जीडीपी का एक फीसदी तक ही मुफ्त योजनाओं में लगाने का दिया सुझाव
  • 31.04 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा सभी राज्यों में पेंशन योजना लाने पर
  • पंजाब : 242 फीसदी राजस्व का खर्च होगा मुफ्त योजनाओं पर

कल्याणकारी योजनाओं से फर्क मुश्किल
रिपोर्ट के अनुसार, मुफ्त व कल्याणकारी योजनाओं में बहुत महीन फर्क है। इसे दर्शा पाना मुश्किल होगा।

  • मुफ्त योजनाएं : यह नहीं देखती कि किसे फायदा मिलना चाहिए, किसे नहीं। जैसे मुफ्त बिजली-पानी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, साइकिल, किसान लोन माफी।
  • कल्याणकारी योजना : लक्ष्य उन लोगों तक मदद पहुंचाना है, जिन्हें जरूरत है। जैसे 80 करोड़ लोगों को महामारी के समय अनाज मुहैया करवाना।

पेंशन खास वर्ग को, टैक्स सभी से वसूला जाएगा

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रिपोर्ट में कहा है, ‘वित्तीय हाराकीरी’ बन रही इस समस्या का समाधान जरूरी हो चुका है। कई राज्यों में कर संग्रह के मुकाबले अधिक फंड की जरूरत होगी। पेंशन एक वर्ग को मिलेगी, टैक्स सभी से वसूला जाएगा।

  • कीमतों पर असर : मुफ्त योजनाओं से वित्तीय बोझ बढ़ता है, कीमतों पर बुरा असर पड़ता है। संसाधन भी गलत ढंग से आवंटित होने लगते हैं। कीमत करदाता चुकाते है।

2022-23 में ‘मुफ्त’ चुनावी वादे राज्यों को पड़ेंगे महंगे
जिन राज्यों में जल्द चुनाव हैं, वहां राजनीतिक दल कई मुफ्त स्कीमों की घोषणाएं कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में इन पर खर्च राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले 1 से 3 प्रतिशत और कर संग्रह के मुकाबले 2 से 10 प्रतिशत पहुंच सकता है। गुजरात में यह क्रमश: 5 से 8 व 8 से 13 तक हो सकता है।

प्रमुख राज्यों में घोषित मुफ्त स्कीमों पर खर्च की मौजूदा स्थिति
राज्य जीएसडीपी के मुकाबले राजस्व के मुकाबले कर राजस्व के मुकाबले
हरियाणा 0.1 0.6 0.9
पंजाब 7 17.8 45.4
राजस्थान 0.6 3.9 8.6
आंध्र प्रदेश 2.1 14.1 30.3
बिहार 0.1 0.6 2.7
झारखंड 1.7 8.0 26.7
मध्यप्रदेश 1.6 10.8 28.8
पं. बंगाल 1.1 9.5 23.8
(सभी आंकड़े प्रतिशत में)

प्रमुख राज्यों में पेंशन फंड के मुकाबले ऐसा रहेगा कर राजस्व
हिमाचल 450%
पंजाब 242%
झारखंड 217%
छत्तीसगढ़ 207%
राजस्थान 190%
गुजरात 138%
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इतना बढ़ेगा पुरानी पेंशन से नया बोझ 
2020 में बोझ (हजार करोड़), कुल बोझ में हिस्सा, पुरानी पेंशन लाने पर बोझ (लाख करोड़)
छत्तीसगढ़ 6,638 1.9% 0.60
झारखंड 6,005 1.7% 0.54
राजस्थान 20,761 6.0% 1.87
पंजाब 10,294 3.0% 0.92
हिमाचल प्रदेश 5,490 1.6% 0.49
गुजरात 17,663 5.1% 1.59

यूपी : जीएसडीपी का 6.3 प्रतिशत लोन गारंटी
राज्यों की आकस्मिक देनदारी भी तेजी से बढ़ कर 2022 में बजट का 4.5 प्रतिशत हो चुकी हैं। इनमें बजट के अलावा लिया उधार, सरकारी संस्थाओं के लोन और इनके लिए सरकारों की गारंटी शामिल हैं। यूपी में यह लोन गारंटी 6.3 प्रतिशत है।

राज्य : जीएसडीपी के मुकाबले प्रतिशत
  • यूपी : 6.3
  • हरियाणा : 2.7
  • हिमाचल : 1.4
  • पंजाब : 1.4
  • उत्तराखंड : 0.2
  • राजस्थान : 7.1
  • तेलंगाना : 11.7
  • सिक्किम : 10.8
  • आंध्र प्रदेश : 9.8
  • राजस्थान : 7.1
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