भारत की वृद्धि दर धीमी होने के बावजूद वित्त वर्ष 2024-25 में 6.8 प्रतिशत और 2025-26 के लिए 6.6 प्रतिशत रह सकती है। ये बहुत हद तक मजबूत आंकड़े हैं। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने अपने ताजा अपडेट में यह अनुमान जताया है। एजेंसी के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में कमजोर निवेश के कारण आर्थिक गति में मंदी के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था पर कई अन्य कारकों का सकारात्मक असर पड़ रहा है।
एसएंडपी के अनुसार महंगाई में कमी, अनुकूल मानसून की स्थिति और सरकार के सामाजिक खर्च में वृद्धि से घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावे, स्वस्थ कॉर्पोरेट बैलेंस शीट निजी निवेश की वसूली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने अक्तूबर महीने का वैश्विक आर्थिक पूर्वानुमान अपडेट जारी किया है, जिसमें भू-राजनीतिक कारकों से जोखिमों को स्वीकार करते हुए नीति प्रोत्साहन की मदद से स्थिर वैश्विक आर्थिक विस्तार पर जोर दिया गया है।
अपडेट के अनुसार महंगाई के दृष्टिकोण में कमी और मौद्रिक नीतियों में ढील को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी का प्रमुख कारण बताया गया है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के वैश्विक अर्थशास्त्री केन वाट्रेट ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था नरम लैंडिंग के लिए ट्रैक पर है, मुद्रास्फीति की दरें कम हो रही हैं और मौद्रिक नीति में ढील अधिक व्यापक हो रही है। फिर भी, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में विस्तार को धीमा करने या यहां तक कि पटरी से उतारने की क्षमता है।"
रिपोर्ट में चीन और जापान को छोड़कर क्षेत्र के लिए 2024 में 4.3 प्रतिशत और 2025 में 4.4 प्रतिशत की वार्षिक वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है। इस वृद्धि में सहायता करने वाली लचीली घरेलू मांग है, क्योंकि क्षेत्रीय केंद्रीय बैंक अधिक उदार मौद्रिक रुख अपनाते हैं।
सितंबर में यूएस फेडरल रिजर्व के ढील चक्र की शुरुआत ब्याज दरों में कटौती के लिए अधिक जगह बना रही है, जिससे फिलीपींस, न्यूजीलैंड, हांगकांग एसएआर और इंडोनेशिया सहित कई केंद्रीय बैंकों को दरें कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के अनुसार वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन जोखिम भी हैं। भू-राजनीतिक तनाव संभावित रूप से आर्थिक प्रगति को पटरी से उतार सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अनिश्चितताएं अधिक हैं। फिर भी, विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नीतिगत उपाय, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के साथ-साथ, सतत आर्थिक विस्तार के लिए मंच तैयार कर रहे हैं।
डेलॉय ने कहा- FY24-25 में 7 से 7.2% रह सकती है वृद्धि दर
अक्टूबर 2024 के लिए डेलॉइट इंडिया के इकोनॉमी आउटलुक के अनुसार, तिमाही वृद्धि में हालिया मंदी के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-से-जून तिमाही में, भारत की जीडीपी में साल-दर-साल 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछली पाँच तिमाहियों में सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाती है।