भारत 2025 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारत की अनुमानित जीडीपी 2025 में 4,187.017 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, जबकि जापान की जीडीपी लगभग 4,186.431 अरब डॉलर रहेगी। ये दावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अप्रैल 2025 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम विश्व आर्थिक आउटलुक के अप्रैल 2025 के संस्करण के अनुसार, भारत इसी साल जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी 4,187.017 बिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है, जो जापान के संभावित जीडीपी से थोड़ी अधिक है। इस वित्त वर्ष में जापान की अनुमानित जीडीपी 4,186.431 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया है। अब भारत से आगे सिर्फ अमेरिका, चीन और जर्मनी है।
2028 में पहुंच सकती है तीसरे स्थान पर
2024 तक भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन 2025 में यह एक पायदान ऊपर चढ़ जाएगा। खास बात यह है कि आने वाले सालों में भारत की रफ्तार और तेज होगी। आईएमएफ के मुताबिक, 2028 तक भारत जर्मनी को भी पछाड़ देगा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उस समय भारत की जीडीपी करीब 5,584.476 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि जर्मनी की जीडीपी 5,251.928 अरब डॉलर होगी।
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2027 में पांच ट्रिलियन डॉलर होगी अर्थव्यवस्था
आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत 2027 में पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उस साल भारत की जीडीपी लगभग 5,069.47 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। दुनिया में फिलहाल अमेरिका और चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और आईएमएफ के अनुसार, यह स्थिति इस दशक के अंत तक बनी रहेगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव
आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी है कि पिछले 80 सालों से जिस वैश्विक आर्थिक प्रणाली के तहत दुनिया काम कर रही थी, अब वह बदल रही है। दुनिया एक नए आर्थिक युग में प्रवेश कर रही है, जहां व्यापार और निवेश के नियमों में बड़े परिवर्तन देखे जा रहे हैं।
भारत की विकास दर थोड़ी घटी
आईएमएफ ने भारत की 2025 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान थोड़ा घटाकर 6.2% कर दिया है। इससे पहले जनवरी 2025 की रिपोर्ट में यह अनुमान 6.5% लगाया गया था। आईएमएफ का कहना है कि यह कटौती अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ (शुल्क) फैसलों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण की गई है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का विकास दर अब भी स्थिर है और यह मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में बढ़ती खरीदारी से समर्थित है।