भारत आईएमएफ समेत वैश्विक बहुपक्षीय एजेंसियों से पाकिस्तान को दिए जाने वाले फंड और लोन पर फिर से विचार करने के लिए कहेगा। सरकार से जुड़े सूत्रों ने यह जनकारी दी है। पिछले महीने पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से घेरना चाहता है। हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे। एक सरकारी सूत्र ने कहा, "हम सभी बहुपक्षीय एजेंसियों से पाकिस्तान को दिए जाने वाले लोन और सहायता की समीक्षा करने के लिए कहेंगे।"
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आईएमएफ कार्यकारी बोर्ड विस्तारित वित्तपोषण सुविधा की पहली समीक्षा के लिए 9 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने वाला है। आईएमएफ बोर्ड अपने जलवायु परिवर्तन ऋण कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के लिए 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की नई व्यवस्था का मूल्यांकन करेगा। यह मौजूदा 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज का भी मूल्यांकन करेगा। 31 दिसंबर, 2024 तक, एशियाई विकास बैंक (ADB) ने पाकिस्तान को 764 सार्वजनिक क्षेत्र के ऋण, अनुदान और तकनीकी सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसकी कुल कीमत 43.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
पाकिस्तान में एडीबी के मौजूदा सॉवरेन पोर्टफोलियो में 9.13 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 53 ऋण और 3 अनुदान शामिल हैं। एडीबी बाढ़ की आशंका वाले लगभग 900 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों को बेहतर बनाने के लिए खैबर पख्तूनख्वा ग्रामीण सड़क विकास परियोजना के लिए 320 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। विश्व बैंक ने नकदी संकट से जूझ रहे देश पाकिस्तान के लिए जनवरी 2025 में 20 अरब डॉलर के ऋण पैकेज को मंजूरी दी थी।
एफएटीएफ की जून में बैठक, भारत ने शुरू की कोशिश
भारत ने पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे सूची में शामिल कराने की अपनी कोशिश शुरू कर दी है। वैश्विक संस्था एफएटीएफ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण पर नजर रखती है। इसकी बैठक अगले महीने जून में होनी है। एफएटीएफ का फैसला लेने वाला निकाय प्लेनरी साल में तीन बार फरवरी, जून और अक्तूबर में बैठक करता है। इनमें सदस्य देश एक दूसरे के कामकाज की समीक्षा करते हैं। इन रिपोर्ट के आधार पर किसी देश को ग्रे या ब्लैक सूची में डाला जाता है।
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ग्रे सूची में जाने पर पाकिस्तान पर कड़ी होगी निगरानी
ग्रे सूची में उन देशों को डाला जाता है, जो पैसों की हेराफेरी करते हैं और आतंकवाद को रोकने संबंधी नियमों का पालन करने में नाकाम रहते हैं। ग्रे सूची में शामिल होने पर पाकिस्तान के वित्तीय मामलों की ज्यादा निगरानी रखी जाएगी। साथ ही उसे आईएमएफ, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे संगठनों से ऋण लेने में दिक्कत आएगी। इसके अलावा उसका निवेश और व्यापार भी प्रभावित होगा। वैसे भी पाकिस्तान का एफएटीएफ की ग्रे सूची से पुराना नाता है। वह इस सूची में शामिल होता रहा है। उसे पहली बार 2008 में इस सूची में डाला गया था। एक साल बाद 2009 में वह इससे बाहर आ गया। इसके तीन साल बाद 2012 में फिर पाकिस्तान ग्रे सूची में आया और 2015 तक इसमें रहा। इसके बाद 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाला गया और 2022 में इससे हटाया गया।