अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने आर्थिक मोर्चे पर भारत को स्टार परफॉर्मर बताया है। आईएमएफ ने सोमवार को कहा कि डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक सुधारों के कारण मजबूत दर से वृद्धि करते हुए भारत एक स्टार परफॉर्मर के रूप में उभरा है। आईएमएफ के अनुसार वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान 16 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि भारत में एक बहुत बड़ी और युवा आबादी है और इसलिए यदि संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से इस क्षमता का उपयोग किया जाता है तो इसमें मजबूत दर से बढ़ने की क्षमता है।सरकार ने कई संरचनात्मक सुधार किए हैं, जिनमें से प्रमुख डिजिटलीकरण है। बीते वर्षों में इस पर काफी काम हुआ है और भविष्य में उत्पादकता व विकास में वृद्धि के लिहाज से यह देश को एक मजबूत मंच प्रदान करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्तीय क्षेत्र लचीला रहा है, जो 2023 की शुरुआत में वैश्विक वित्तीय तनाव से काफी हद तक अप्रभावित रहा है। जबकि बजट घाटा कम हो गया है, सार्वजनिक ऋण ऊंचा बना हुआ है, और राजकोषीय बफर को फिर से बनाने की आवश्यकता है। वैश्विक स्तर पर, भारत की 2023 की जी-20 अध्यक्षता ने बहुपक्षीय नीति प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में देश की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित किया है।"
रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक मोर्चे पर आम चुनाव अप्रैल 2024 में होने की उम्मीद है। वृहद आर्थिक नीतियां आंशिक रूप से आईएमएफ के पूर्व कर्मचारियों की सलाह के अनुरूप रही हैं। यदि व्यापक सुधारों को लागू किया जाता है तो भारत में अतिरिक्त श्रम और मानव पूंजी की मदद से उच्च विकास का स्तर हासिल करने की क्षमता है।
आईएमएफ ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 9.1 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार महामारी के कारण आउटसोर्सिंग की मजबूत वैश्विक मांग ने वित्त वर्ष 2022-23 में सेवा निर्यात वृद्धि को एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया, जिससे शुद्ध निर्यात में इजाफा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 की शुरुआत में सेवा निर्यात में कुछ गति आई, जो मुख्य रूप से भागीदार देशों में मांग में मंदी को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत पर मजबूत बनी रही, जिसे मजबूत घरेलू मांग का समर्थन मिला।
एक सवाल के जवाब में चौइरी ने कहा कि निवेश और वृद्धि के लिए राजनीतिक स्थिरता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "हमने कोई आंकड़ा बताने के लिए कोई मात्रात्मक विश्लेषण नहीं किया है, लेकिन बहुत सारे शोध हैं जो राजनीतिक स्थिरता और एक स्पष्ट नीतिगत माहौल के महत्व की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने कहा कि आईएमएफ का मानना है कि श्रम सुधार की जरूरत है। इसलिए, हमारे विचार में, यह सुनिश्चित करने के लिए एक बहुत ही ठोस प्रयास होना चाहिए। इसका मतलब शिक्षा, कौशल और महिला श्रम बल की भागीदारी बढ़ाना है।"
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2023-24 और अगले वित्त वर्ष में 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आईएमएफ ने देश के मौजूदा और मध्यम अवधि के आर्थिक परिदृश्य की समीक्षा करने वाली अपनी अनुच्छेद चार परामर्श रिपोर्ट में कहा है कि वृहद आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के समर्थन से देश की वृद्धि मजबूत बने रहने की उम्मीद है।