भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2032 तक तीन गुना बढ़कर 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसमें कहा गया है एशिया-प्रशांत क्षेत्र जहां वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, वहीं भारत तेजी से इस उद्योग में एक अहम भूमिका निभा रहा है। देश का सेमीकंडक्टर बाजार, जिसका मूल्य 2023 में 34.3 अरब डॉलर दर्ज हुआ, इसमें 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की संभवना है।
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वैश्विक सेमीकंडक्टर का बाजार आकार एक ट्रिलियन पहुंचने की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग मजबूत विस्तार की राह पर है। इसका बाजार आकार 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2023 और 2030 के बीच लगभग 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है।
भारत ने 2022 में 516 मिलयिन डॉलर का निर्यात किया
भारत ने 2022 में 516 मिलियन डॉलर मूल्य के सेमीकंडक्टर उपकरणों का निर्यात किया। इसमें अमेरिका, हांगकांग और दक्षिण अफ्रीका को निर्यात किया गया। हालांकि 4.55 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर आयात किया गया, इसमें चीन, सींगापुर और वियतनाम प्रमुख आपूर्तिकर्ता थे।
स्वदेशी सेमींकडक्टर डिजाइन कंपनियों को दिया जा रहा बढ़ावा
भारत में घरेलू सेमींकडक्टर डिजाइन कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन-लिंक्ड प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू किया गया है। 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए एक प्रतिभा विकास पहल की शुरूआत की गई है।
भारतीय राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए आगे आ रहे
गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही विशिष्ट सेमीकंडक्टर नीतियां लागू कर दी हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और अन्य राज्य इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए आगे आ रहे हैं।
वैश्विक कार्यबल में भारतीय इंजीनियरों का योगदान 20 प्रतिशत
वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन कार्यबल में भारतीय इंजीनियरों का योगदान लगभग 20 प्रतिशत है। वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ-साथ घरेलू डिज़ाइन सेवाओं में एक लाख से ज्यादा वीएलएसआई डिजाइन इंजीनियर कार्यरत हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर, इलेक्टॉनिक्स के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, मेक इन इंडिया अभियान और सेमीकॉन इंडिया सहित नीतिगत उपाय देश को चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता के करीब ले जा रहे हैं।